नई दिल्ली, 05 फरवरी। UPSC (संघ लोक सेवा आयोग) ने 4 फरवरी 2026 को सिविल सेवा परीक्षा (CSE) 2026 का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस बार आयोग ने सर्विस एलोकेशन, प्रयास (Attempts) और डिजिटल सुरक्षा को लेकर कई अहम और बड़े बदलाव किए हैं। खासतौर पर IPS, IAS और IFS से जुड़े नियमों को और अधिक स्पष्ट व सख्त किया गया है।

अब नहीं चलेगा बार-बार एग्जाम देना
नए नियमों के तहत, यदि किसी उम्मीदवार का चयन पहले ही भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में हो चुका है, तो वह CSE 2026 के जरिए दोबारा IPS का विकल्प नहीं चुन सकेगा। वहीं, कार्यरत IAS और IFS अधिकारियों को अब सिविल सेवा परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यदि किसी उम्मीदवार की नियुक्ति मेन्स परीक्षा से पहले इन सेवाओं में हो जाती है, तो उसे मुख्य परीक्षा देने की अनुमति नहीं मिलेगी।
UPSC ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो उम्मीदवार CSE 2025 या उससे पहले किसी सेवा में चयनित हो चुके हैं, उन्हें अपने बचे हुए प्रयासों का उपयोग करने के लिए 2026 या 2027 में एक अंतिम अवसर दिया जाएगा। इस दौरान उन्हें इस्तीफा देने की आवश्यकता नहीं होगी।
ग्रुप-A सेवाओं से जुड़े उम्मीदवारों के लिए भी नियमों में बदलाव किया गया है। यदि कोई उम्मीदवार 2026 में ग्रुप-A सेवा में चयनित होने के बाद फिर से परीक्षा देना चाहता है, तो उसे संबंधित विभाग से ट्रेनिंग में शामिल न होने की आधिकारिक छूट लेनी होगी। यदि कोई उम्मीदवार न तो ट्रेनिंग जॉइन करता है और न ही छूट लेता है, तो उसका 2026 का आवेदन रद्द कर दिया जाएगा। इसके अलावा, यदि वह 2027 में दोबारा सफल होता है, तो उसे दोनों सेवाओं में से किसी एक को चुनना होगा, दूसरी सेवा स्वतः निरस्त मानी जाएगी।
परीक्षा में फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए UPSC ने डिजिटल सुरक्षा को और मजबूत किया है। अब AI-आधारित फेशियल रिकॉग्निशन और आधार वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है। उम्मीदवारों को एक नए चार-चरणीय रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर आवेदन करना होगा, जो पूरी तरह आधार से जुड़ा होगा।
योग्यता मानदंड
इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (IAS) के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास भारत की किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में स्नातक (बैचलर) डिग्री होना अनिवार्य है।
वहीं, इंडियन फॉरेस्ट सर्विस (IFS) के उम्मीदवारों के लिए एनिमल हसबेंडरी, वेटरनरी साइंस, बॉटनी, केमिस्ट्री, जियोलॉजी, मैथमेटिक्स, फिजिक्स, स्टैटिस्टिक्स, जूलॉजी या एग्रीकल्चर जैसे विषयों में स्नातक डिग्री जरूरी होगी।
UPSC के इन नए नियमों को सिविल सेवा चयन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

