हमीरपुर/उत्तर प्रदेश, 28 फरवरी। Ball Gadi Baraat : जिले के मौदहा थाना क्षेत्र में सैकड़ों साल पुरानी परंपरा को फिर से जीवित करते हुए 25 सजी-धजी बैलगाड़ियों से बारात निकाली गई। इस पारंपरिक विवाह में लगभग 200 लोग शामिल हुए। करीब 50 वर्ष तक बंद रही यह परंपरा अब दोबारा लोगों के बीच लौट आई है।

बैलगाड़ी बारात का सफर
दूल्हा मोहित द्विवेदी और बराती गांव के खेतों के रास्ते लगभग तीन किलोमीटर का सफर तय कर द्विवेदी परिवार के फार्म हाउस पहुंचे। वहां बिना शोर-शराबे और आडंबर के पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह संपन्न हुआ।
दूल्हे के पिता जागेंद्र द्विवेदी ने बताया कि उनका सपना था कि शादी में बैलगाड़ी बारात निकाली जाए। इसके लिए 25 बैलगाड़ी विशेष रूप से बुक की गई थीं।
विवाह समारोह की खासियत
बारात में कठघोड़वा डांस, लौंडा नाच, तमूरा भजन और महिलाओं द्वारा गाए गए पारंपरिक बुंदेलखंडी गीत शामिल थे। भोजन में परोसे गए देशी व्यंजन, जैसे कद्दू, आलू-बैंगन की सब्जी और अन्य पारंपरिक पकवान। भोजन सभी मेहमानों को सम्मानपूर्वक बैठाकर परोसा गया।
तीन दिन तक चली रस्में
शादी की रस्में तीन दिनों तक चलीं, जिसमें पहले दिन तिलक, दूसरे दिन द्वारचार और तीसरे दिन विदाई हुई। विशेष बात यह रही कि 26 फरवरी को दुल्हन की विदाई भी बैलगाड़ी (Ball Gadi Baraat) से की गई, जिसे वहां मौजूद सभी लोगों ने यादगार पल के रूप में याद किया। यह आयोजन बुंदेलखंड की पारंपरिक शादी रीति-रिवाज और ग्रामीण संस्कृति को जीवित रखने का बेहतरीन उदाहरण माना जा रहा है।

