Environmental Violations : पर्यावरणीय उल्लंघन पर 15 उद्योगों पर गिरी गाज…! 9.22 लाख की क्षतिपूर्ति…15 इकाइयों का उत्पादन बंद

Environmental Violations : पर्यावरणीय उल्लंघन पर 15 उद्योगों पर गिरी गाज…! 9.22 लाख की क्षतिपूर्ति…15 इकाइयों का उत्पादन बंद

रायपुर, 02 मार्च। Environmental Violations : छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन पर पखवाड़े भर में बड़ी कार्रवाई करते हुए 15 उद्योगों पर उत्पादन बंद एवं विद्युत विच्छेदन की कार्रवाई की है। साथ ही तीन उद्योगों पर कुल 9 लाख 22 हजार रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति अधिरोपित की गई है।

मंडल द्वारा 10 फरवरी से 25 फरवरी 2026 के बीच नियमित एवं आकस्मिक निरीक्षण किए गए, जिनमें वायु एवं जल प्रदूषण से जुड़े गंभीर उल्लंघन सामने आए।

स्पंज आयरन उद्योग पर कार्रवाई

ग्राम चरौदा, रायपुर स्थित मे. पुष्प स्टील्स एंड माइनिंग प्रा. लिमिटेड (पूर्व नाम – इंडियन स्टील एंड पॉवर प्रा. लिमिटेड) में वायु प्रदूषण पाए जाने पर वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1981 की धारा 31(क) के तहत उत्पादन बंद करने और विद्युत विच्छेदन के आदेश जारी किए गए।

रावांभाठा में 11 इकाइयों पर गाज

मेटल पार्क, रावांभाठा क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान 9 स्लैग क्रशर, 1 बाइंडिंग वायर इकाई और 1 स्टील फर्नीचर इकाई बिना वैध सम्मति और प्रदूषण की स्थिति में संचालित पाई गईं। इन 11 इकाइयों के विरुद्ध वायु अधिनियम 1981 की धारा 31(क) एवं जल अधिनियम 1974 की धारा 33(क) के तहत उत्पादन बंद एवं बिजली कटौती की कार्रवाई की गई।

सिलतरा और उरला क्षेत्र में भी कार्रवाई

सिलतरा स्थित मे. एसकेए इस्पात प्रा. लिमिटेड (पूर्व नाम – जोरावर इंजीनियरिंग एंड फाउंड्री फोर्ज प्रा. लिमिटेड) में वायु प्रदूषण पाए जाने पर 19 फरवरी 2026 को उत्पादन बंद एवं विद्युत विच्छेदन के आदेश जारी किए गए। उरला-गोंदवारा स्थित मे. छत्तीसगढ़ फेरो ट्रेडर्स प्रा. लिमिटेड में भी वायु प्रदूषण पाए जाने पर यही कार्रवाई की गई।

9.22 लाख की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति

मंडल ने उल्लंघन अवधि के लिए तीन उद्योगों पर कुल ₹9,22,000 की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति अधिरोपित की है। मंडल ने स्पष्ट किया है कि जब तक संबंधित उद्योग पर्यावरणीय मानकों, वैधानिक प्रावधानों और सम्मति शर्तों का पूर्ण पालन सुनिश्चित नहीं करते, तब तक संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी।

क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा औद्योगिक क्षेत्रों में निरीक्षण (Environmental Violations) की कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी और प्रदूषण पाए जाने पर वायु एवं जल अधिनियमों के तहत सख्त कदम उठाए जाएंगे

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