नई दिल्ली, 24 मार्च। Conversion VS Reservation : सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति (SC) से जुड़े एक अहम मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण करने पर अनुसूचित जाति का दर्जा स्वतः समाप्त हो जाता है।
यह फैसला जस्टिस पी.के. मिश्रा और जस्टिस ए.वी. अंजारिया की पीठ ने सुनाया। सुनवाई के दौरान मुख्य सवाल यह था कि क्या हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपनाने वाला व्यक्ति अनुसूचित जाति के दर्जे का दावा कर सकता है।
अदालत ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि जो व्यक्ति हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को अपनाता है, वह अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि धर्म परिवर्तन के बाद संबंधित व्यक्ति को SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत मिलने वाले कानूनी संरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा।
अदालत ने रिकॉर्ड के आधार पर पाया कि संबंधित व्यक्ति लंबे समय से ईसाई धर्म का पालन कर रहा था और धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय था। ऐसे में उसे अनुसूचित जाति का सदस्य मानना उचित नहीं है।
इस फैसले को अनुसूचित जाति से जुड़े कानूनी और सामाजिक पहलुओं (Conversion VS Reservation) के लिहाज से अहम माना जा रहा है, जिसका प्रभाव भविष्य के मामलों पर भी पड़ सकता है।

