काठमांडू, 29 मार्च। Education Reform : नेपाल में शिक्षा को लेकर एक बड़ा वैचारिक बदलाव शुरू हो गया है। बालेन शाह के नेतृत्व वाली नई सरकार ने जो 100 दिवसीय एक्शन प्लान पेश किया है, वह सिर्फ सुधार नहीं बल्कि ‘कैंपस की आज़ादी’ की घोषणा माना जा रहा है।
अब तक नेपाल के स्कूल और विश्वविद्यालय लंबे समय से छात्र राजनीति के गढ़ माने जाते रहे हैं। लेकिन नए फैसले के बाद ये संस्थान ‘पावर सेंटर’ से ‘नॉलेज सेंटर’ बनने की दिशा में धकेले जा रहे हैं। सरकार ने साफ कर दिया है- कैंपस में अब नारे नहीं, सिर्फ पढ़ाई होगी।
छात्र नेता से छात्र प्रतिनिधि तक का सफर
राजनीतिक दलों से संबद्ध सभी छात्र संगठनों की गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है। अगले 60 दिनों के भीतर, इन संगठनों को शैक्षणिक परिसरों से अपनी सभी कार्यालय आदि हटा लेनी होंगी।
राजनीतिक छात्र संगठनों पर प्रतिबंध के साथ ही सरकार एक नया मॉडल ला रही है ‘स्टूडेंट काउंसिल’। यानी अब छात्र नेताओं की जगह ‘छात्र प्रतिनिधि’ होंगे, जो किसी पार्टी नहीं बल्कि छात्रों के मुद्दों की आवाज बनेंगे।
पक्षपातपूर्ण राजनीति के बजाय, अब अगले 90 दिनों में छात्रों की वास्तविक समस्याओं को सुनने के लिए गैर-राजनीतिक तंत्र जैसे ‘छात्र परिषद’ या ‘छात्रों की आवाज़’ विकसित किए जाएंगे।
नागरिकता की शर्त हटाई गई
स्नातक स्तर तक की पढ़ाई के लिए नेपाली नागरिकता की अनिवार्य शर्त अब समाप्त कर दी गई है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि किसी भी छात्र की शिक्षा दस्तावेज़ी बाधाओं के कारण बाधित न हो। इसके साथ ही, मंत्रालय द्वारा निर्धारित कैलेंडर के अनुसार, विश्वविद्यालय परीक्षाओं के परिणाम समय पर प्रकाशित करने का निर्णय भी लिया गया है।
स्नातक स्तर तक नागरिकता की अनिवार्यता खत्म करना एक बड़ा सामाजिक बदलाव माना जा रहा है। यह कदम उन हजारों छात्रों के लिए राहत है, जो कागजी प्रक्रियाओं में फंसकर पढ़ाई से दूर हो जाते थे।
विदेशी नामों पर ‘प्रतिबंध’
विदेशी नामों वाले संस्थानों को ‘मौलिक नेपाली पहचान’ देने का फैसला सिर्फ नाम बदलने का नहीं, बल्कि शिक्षा में सांस्कृतिक आत्मनिर्भरता की ओर इशारा करता है। इसके लिए देश में इस समय विदेशी नामों, जैसे ऑक्सफ़ोर्ड, पेंटागन और सेंट ज़ेवियर्स के साथ चल रहे शिक्षण संस्थानों को इसी वर्ष अपने नाम बदलकर ‘मूल नेपाली नाम’ रखने होंगे।
परीक्षा मुक्त बचपन
कक्षा 5 तक परीक्षा खत्म करने का फैसला शिक्षा के दबाव को कम करने की दिशा में बड़ा कदम है। अब बच्चों का आकलन नंबर से नहीं, उनके समग्र विकास से होगा।
दखलंदाज़ी का अंत
बालेन प्रशासन का मानना है कि विश्वविद्यालय परीक्षाओं के नतीजों में देरी और शैक्षणिक कैलेंडर में होने वाली गड़बड़ी, राजनीतिक दखलंदाज़ी का ही नतीजा है। अब से, मंत्रालय द्वारा निर्धारित कैलेंडर के अनुसार, नतीजों को समय पर प्रकाशित करना अनिवार्य होगा। यह कदम उन हज़ारों नेपाली छात्रों को बड़ी राहत देता है, जो शैक्षणिक सत्र में होने वाली देरी के कारण अक्सर विदेश चले जाते हैं। समय पर परीक्षा और रिजल्ट की बाध्यता से इस प्रवृत्ति को रोकने की कोशिश की जा रही है।
कुल मिलाकर, यह सिर्फ नीतिगत बदलाव नहीं बल्कि एक ‘एजुकेशन रिवोल्यूशन’ (Education Reform) की शुरुआत है, जहां किताबें राजनीति पर भारी पड़ती दिख रही हैं।

