Jaggi Murder Case : जग्गी हत्याकांड में आज फैसले का दिन…! 11 हजार पन्नों की CBI रिपोर्ट से खुलेंगे राज…? अमित जोगी की बढ़ सकती हैं मुश्किलें…?

Jaggi Murder Case : जग्गी हत्याकांड में आज फैसले का दिन…! 11 हजार पन्नों की CBI रिपोर्ट से खुलेंगे राज…? अमित जोगी की बढ़ सकती हैं मुश्किलें…?

रायपुर, 02 मार्च। Jaggi Murder Case : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में आज गुरुवार को अहम मोड़ आने जा रहा है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में इस मामले की अंतिम सुनवाई के लिए स्पेशल डिवीजन बेंच गठित की गई है, जिसमें चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद वर्मा शामिल हैं।

इस हाई-प्रोफाइल केस में अब सबकी निगाहें केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की करीब 11 हजार पन्नों की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर फिर खुला केस

यह मामला सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद दोबारा हाईकोर्ट में खोला गया है। पहले हुई सुनवाई में अंतिम बहस के लिए 1 अप्रैल की तारीख तय की गई थी, लेकिन अब गुरुवार को फाइनल सुनवाई होनी है।

सुनवाई में क्या हुआ?

बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता सतीश जग्गी, CBI, राज्य सरकार और अमित जोगी के वकील मौजूद थे। अमित जोगी के वकील ने केस फ़ाइल न मिलने का हवाला देते हुए सुनवाई टालने का अनुरोध किया। हाई कोर्ट ने यह मोहलत देने से इनकार कर दिया। उसने CBI को निर्देश दिया कि वह फ़ाइल तुरंत उपलब्ध कराए और 24 घंटे के भीतर अपना जवाब दाखिल करे।

क्या है अमित जोगी का मामला?

CBI ने शुरू में अमित जोगी समेत 29 लोगों को आरोपी बनाया था। ट्रायल कोर्ट में 28 आरोपियों को दोषी ठहराया गया, जबकि अमित जोगी को बरी कर दिया गया। अब, केस के दोबारा खुलने के बाद, उनकी भूमिका को लेकर फिर से सवाल उठने लगे हैं। कानूनी जानकारों का मानना ​​है कि आगे की कार्यवाही में उन्हें ज़मानत लेनी पड़ सकती है।

2003 में हुई थी सनसनीखेज हत्या

4 जून, 2003 को NCP नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। आरोपियों में से दो सरकारी गवाह बन गए। जबकि 2007 में, ट्रायल कोर्ट ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया।

पहले क्या हुआ था?

शुरुआत में, दो साल पहले, हाई कोर्ट ने दोषियों की अपीलें खारिज कर दी थीं और उनकी आजीवन कारावास की सज़ा को बरकरार रखा था। इसके बाद, सुप्रीम कोर्ट ने CBI की अपील स्वीकार कर ली और मामले को वापस हाई कोर्ट भेज दिया।

सतीश जग्गी का आरोप

जग्गी के बेटे, सतीश जग्गी का आरोप है कि यह हत्या उस समय की सत्ताधारी सरकार द्वारा प्रायोजित एक साज़िश थी। जांच के दौरान सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई थी। इसलिए, केवल सबूतों की नहीं, बल्कि इस साज़िश की जांच होना अत्यंत आवश्यक है।

कौन थे रामावतार जग्गी?

यहां बता दें कि रामावतार जग्गी एक ऐसे नेता थे जिनका संबंध व्यावसायिक पृष्ठभूमि से था। वे पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के करीबी सहयोगी थे और NCP के भीतर उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां निभाई थीं।

केस क्यों अहम है?

यह मामला एक राजनीतिक साज़िश, पुलिस अधिकारियों की मिलीभगत और संगठित अपराध से जुड़े आरोपों के कारण काफ़ी अहम है। इसमें कई प्रभावशाली लोग, जिनमें दो CSP और एक स्टेशन हाउस ऑफिसर शामिल हैं, फंसे हुए हैं। अब, CBI की एक नई रिपोर्ट इस मामले में एक बड़ा मोड़ ला सकती है।

करीब दो दशक पुराने इस हत्याकांड (Jaggi Murder Case) में आज की सुनवाई बेहद निर्णायक मानी जा रही है। अगर कोर्ट CBI की रिपोर्ट को अहम मानता है, तो इस केस में नए सिरे से कानूनी कार्रवाई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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