बिलासपुर, 25 अप्रैल। Ranu Sahu Case : छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक अहम फैसले में कोरबा की पूर्व कलेक्टर और सस्पेंड IAS रानू साहू के रिश्तेदारों की संपत्ति अटैच करने के खिलाफ दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है।
सीधे सबूत नहीं, परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी काफी : कोर्ट
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवीन्द्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में साफ कहा कि अपराध से पहले खरीदी गई संपत्ति भी अटैच की जा सकती है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में सीधे सबूत होना जरूरी नहीं है। परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर भी कार्रवाई संभव है।
दरअसल, कोल लेवी वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग केस में Ranu Sahu आरोपी हैं। जांच के दौरान प्रवर्तन निदेशालय को पता चला कि अवैध लेन-देन के जरिए रिश्तेदारों के नाम पर संपत्ति अर्जित की गई।
इसके बाद ED ने तुषार साहू, पंकज साहू, पीयूष साहू समेत कई रिश्तेदारों की करोड़ों की संपत्तियां अटैच की थीं, जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की गई थीं। हालांकि कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के सभी तर्कों को खारिज करते हुए ED की कार्रवाई को सही ठहराया।

