गणेश पूजा…बेहद सावधानी!!! … मूर्ति स्थापना स्थल पर अगर कोई होगा संक्रमित…तो ईलाज का संपूर्ण खर्च समिति के जिम्मे

रायपुर, 29 जुलाई। प्रेदेश में कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस वर्ष गणेशोत्सव को लेकर कलेक्टर कार्यालय की ओर से सख्त दिशा निर्देश जारी किया गया हैं। इन दिशानिर्देशों में मूर्ति के हाइट से लेकर गणेश पंडाल का आकार तय किया गया है।
मूर्ति की ऊंचाई व चौड़ाई 4 गुणा 4 से अधिक नहीं होनी चाहिए। वहीं गणेश पंडाल का आकार 15 गुणा 15 से अधिक न हो। पंडाल के सामने कम से कम 5000 फीट की जगह होना जरूरी है। इस बार मंडप व पंडाल के सामने न ही दर्शक ज्यादा समय खड़े होकर दर्शन कर सकेंगे और न ही समिति के लोगों को बैठने की व्यवस्था होगी। यहां तक कि आयोजकों के बैठने के लिए भी कुर्सियां न हो।
पंडाल में सिर्फ 20 व्यक्ति
अपर कलेक्टर नंदनवार की ओर से जारी दिशानिर्देशों में पंडाल एवं सामने 5000 वर्गफिट की खुली जगह में कोई भी सड़क अथवा गली का हिस्सा प्रभावित न हो। मंडप हो या दर्शक दीर्घा, किसी भी एक समय में दोनों जगह मिलाकर 20 व्यक्ति से अधिक न हो। मृर्ति स्थापित करने वाले व्यक्ति अथवा समिति एक रजिस्टर मेंटन करेंगे, जिसमें दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं के नाम, पता, मोबाइल नबंर दर्ज किया जायेगा, ताकि अगर उनमें से कोई भी व्यक्ति कोरोना संक्रमित पाए जाने की स्थिति में कान्टेक्ट ट्रेसिंग किया जा सके।
समितियों में CCTV लगाना जरूरी
मूर्ति स्थापित करने वाले व्यक्ति अथवा समितियों को 4 CCTV लगाना आवश्यक होगा, ताकि कोरोना संक्रमित की पहचान हो सके। मूर्ति दर्शन अथवा पूजा में शामिल होने वाला कोई भी व्यक्ति बिना मास्क के नही जायेगा। अगर बिना मास्क पहने कोई भी पंडाल जाएगा तो संबधित एवं समिति के विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही किया जायेगा। मूर्ति स्थापित करने वाले व्यक्ति अथवा समितियों को सैनेटाइजर, थर्मल स्क्रिनिंग, आक्सीमीटर, हेंडवाश एवं क्यू मैनेजमेंट सिस्टम की व्यवस्था करना पड़ेगा। थर्मल स्क्रनिंग में बुखार पाये जाने अथवा कोरोना से संबंधित कोई भी सामान्य या विशेष लक्षण पाये जाने पर पंडाल में प्रवेश नहीं देने की जिम्मेदारी समिति की होगी। व्यक्ति अथवा समिति द्वारा फिजिकल डिसटेंसिंग आगमन एवं प्रस्थान की पृथक से व्यवस्था करना होगा। बांस, बल्ली से बेरिकेटिंग कराकर कराया जायेगा। यदि कोई व्यक्ति जो मूर्ति स्थापना स्थल पर जाने के कारण संक्रमित हो जाता है तो ईलाज का संपूर्ण खर्च मूर्ति स्थापना करने वाला व्यक्ति अथवा समिति द्वारा किया जायेगा।
कंटेनमेंट क्षेत्र में नहीं होगा गणेश पूजा
कंटेनमेंट जोन में मूर्ति स्थापना की अनुमति नहीं होगी। यदि पूजा की अवधि के दौरान भी उपरोक्त क्षेत्र कंटेनमेंट क्षेत्र घोषित हो जाता है, तो तत्काल पूजा समाप्त करनी होगी।
मूर्ति स्थापना के दौरान, विसर्जन के समय अथवा विसर्जन के पश्चात किसी भी प्रकार के भोज, भंडारा, जगराता अथवा सांस्कृतिक कार्यक्रम करने की अनुमति नहीं होगी। मूर्ति स्थापना के समय स्थापना के दौरान, विसर्जन के समय अथवा विसर्जन के पश्चात किसी भी प्रकार के वादय यंत्र, ध्वनि विस्तारक यत्र डीजे बजाने की अनुमति नहीं होगी।
मूर्ति स्थापना एवं विसर्जन के दौरान प्रसाद चरणामृत या कोई भी खाद्य एवं पेय पदार्थ वितरण की अनुमति नहीं होगी।
मूर्ति विसर्जन के लिए एक से अधिक वाहन की अनुमति नहीं होगी। मूर्ति विसर्जन के लिए पिकअप टाटाएस (छोटाहाथी) से बडे बाहन का उपयोग प्रतिबंधित होगा।
विसर्जन के लिए सिर्फ 4 व्यक्ति जाएंगे
मूर्ति विसर्जन के लिए 4 से अधिक व्यक्ति नहीं जा सकेंगे एवं वे मूर्ति के वाहन में ही बैठेगे। पृथक से वाहन ले जाने की अनुमति नहीं होगी। मूर्ति विसर्जन के लिए प्रयुक्त वाहन पंडाल से लेकर विसर्जन स्थल तक रास्ते में कही रोकने की अनुमति नहीं होगी। विसर्जन के लिए नगर निगम द्वारा निर्धारित रूट, मार्ग, तिथि एवं समय का पालन करना होगा। शहर के व्यस्त मार्गो से मूर्ति विसर्जन वाहन को ले जाने की अनुमति नहीं होगी। सामान्य रूप से सभी वाहन रिंग रोड के माध्यम से ही गुजरेगे। विसर्जन के मार्ग में कही भी स्वागत भंडारा, प्रसाद वितरण पंडाल लगाने की अनुमति नहीं होगी।
घर में मूर्ति स्थापित के लिए भी शर्त
सूर्यास्त के पश्चात एवं सूर्योदय के पहले मूर्ति विसर्जन के किसी भी प्रक्रिया की अनुमति नहीं होगी। इन शर्तो के साथ घरों में मूर्ति स्थापित करने की अनुमति होगी, यदि घर से बाहर मूर्ति स्थापित किया जाता है तो कम से कम 7 दिन पहले नगर निगम के संबंधित जोन कार्यालय में निर्धारित शपथ पत्र आवेदन देना होगा एवं अनुमति मिलने के बाद ही मूर्ति स्थापित करने की अनुमति होगी। (फाइल फोटो)