अंतरिक्ष में उड़ान के लिए तैयार जेफ बेजोस, न्यू शेपर्ड राकेट से आज भरेंगे उड़ान; जानें सबकुछ

नई दिल्ली, 20 जुलाई। दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति और अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस अंतरिक्ष में उड़ान के लिए तैयार हैं। उनकी कंपनी ब्लू ओरिजन का न्यू शेपर्ड राकेट बेजोस समेत कुल चार लोगों को लेकर मंगलवार को उड़ान भरेगा। बेजोस की टीम पिछले हफ्ते अंतरिक्ष यात्रा पर गई रिचर्ड ब्रेनसन की टीम से भी आगे तक जाएगी। बेजोस के इस सफर में सबसे खास बात उनका राकेट है, जो पूरी से तरह से दोबारा प्रयोग किया जा सकेगा। निसंदेह यह अंतरिक्ष में जाने के सफर को सस्ता करेगा।
कारमन लाइन को करेंगे पार
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पृथ्वी से 100 किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष की सीमा मानी गई है, जिसे कारमन लाइन कहा जाता है। बेजोस अपनी टीम के साथ इस सीमा के आगे तक जाएंगे। ब्रेनसन की टीम 86 किलोमीटर तक गई थी।
कुल चार सवार
जेफ बेजोस के अलावा उनके भाई मार्क बेजोस, सबसे कम उम्र में अंतरिक्ष में जा रहा 18 वर्षीय छात्र ओलिवर डेमन और सबसे ज्यादा उम्र में अंतरिक्ष में जा रही 82 वर्षीय वैली फंक इस यान में रहेंगी। फिलहाल उनकी टीम अंतरिक्ष में रवाना होने से पहले प्रशिक्षण के लिए ब्लू ओरिजन के ‘एस्ट्रोनाट विलेज’ में रुकी है।
तारीख की भी कहानी
जेफ बेजोस ने अंतरिक्ष में जाने के लिए 20 जुलाई की तारीख भी बहुत सोच समझकर तय की है। 1969 में इसी दिन इंसान ने पहली बार चांद पर कदम रखा था। अमेरिका का अपोलो-11 अंतरिक्ष यान नील आर्मस्ट्रांग और बज एल्डि्रन को लेकर चांद पर पहुंचा था। ब्लू ओरिजन के राकेट का नाम भी अंतरिक्ष में जाने वाले पहले अमेरिकी एलन शेपर्ड के सम्मान में न्यू शेपर्ड रखा गया है।
वीटीवीएल राकेट है शेपर्ड
ब्लू ओरिजन का न्यू शेपर्ड राकेट वीटीवीएल (वर्टिकल टेक-आफ वर्टिकल लैंडिंग) तकनीक पर काम करता है। इस तकनीक में राकेट जिस तरह ऊपर जाता है, ठीक उसी तरह से नियंत्रित और कम गति से नीचे की ओर आता है। इसमें लगा कंप्यूटर ही इस पूरे सफर को नियंत्रित करेगा। स्पेसएक्स का फाल्कन-9 कुछ हद तक इस श्रेणी में आता है, हालांकि इसे पूरी तरह दोबारा प्रयोग में नहीं लाया जा सकता है। स्पेसएक्स अपने स्टारशिप राकेट पर भी काम कर रही है। माना जा रहा है कि यह बिलकुल न्यू शेपर्ड जैसा होगा।
कठिन रही है डगर
वीटीवीएल की तकनीक सुनने में भले आसान लगे, लेकिन असल में यह इतना आसान नहीं है। इस दिशा में सफलता से पहले कई प्रयोग विफल भी हुए हैं। नीचे की ओर आते समय राकेट के थ्रस्ट को नियंत्रित करना बड़ी चुनौती होती है। वापसी की पूरी प्रक्रिया को नियंत्रित करने के लिए हर बारीक चीज का ध्यान रखना होता है। लैंडिंग के समय किसी भी गणना में जरा सी चूक से पूरी कोशिश विफल हो सकती है। चांद पर उतरते समय भारत के चंद्रयान-2 के लैंडर के मामले में ऐसी ही चूक से मिशन विफल हो गया था।
सफर के पड़ाव
– न्यू शेपर्ड राकेट यात्रियों समेत कैप्सूल को लेकर उड़ान भरेगा और कारमन लाइन पर पहुंचकर कैप्सूल अलग हो जाएगा
– यात्रियों को चार मिनट अंतरिक्ष में भारहीनता का अनुभव होगा। इसके बाद पैराशूट के जरिये वेस्ट टेक्सास के रेगिस्तान में कैप्सूल की लैंडिंग होगी।