राजधानी अस्पताल अग्निकांड मामले में दो डॉक्टर गिरफ्तार, 6 मरीजों की हुई थी मौत

रायपुर, 4 मई। रायपुर के राजधानी अस्पताल में हुए अग्निकांड के 16 दिन बाद पुलिस ने अस्पताल के संचालक डॉक्टर सचिन मल और डॉक्टर अरविंदाे को गिरफ्तार किया है। टिकारापारा थाने में इनके खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज है। 16 दिनों तक पुलिस से छिपने और बचने में कामयाब रहे इन डॉक्टर्स को अब जाकर पुलिस ने पकड़ा है। उस हादसे में अपने परिजनों को खो चुके घर वालों को डर है कि कहीं फिर पैसे और रसूख की ताकत से ये छूट न जाएं। हादसे में जलकर मरे रमेश साहू के भाई प्रिय प्रकाश ने कहा कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। कानून में जो भी सजा इन जैसों के लिए है, मेरी सरकार से गुजारिश है कि वो इन्हें मिले, ये बिना सजा पाए कहीं छूट न जाएं।
लंबी कारों में आते थे डॉक्टर्स, इलाज के नाम पर चलता है लाखों का पैकेज
राजधानी अस्पताल में हुई आगजनी में अपने भाई को खोने वाले प्रिय प्रकाश साहू ने कहा कि यहां के डॉक्टर्स हाई प्रोफाइल लाइफ स्टाइल जीते हैं। BMW ब्रांड के लेटेस्ट मॉडल वाली गाड़ियों में सवार होकर पहुंचते थे। एक तरफ तो सरकार ने कोविड मरीजों के उपचार के लिए रेट तय कर रखे हैं मगर इसके बाद भी एक हफ्ते के लिए ढाई लाख, 4 लाख का पैकेज यहां बताया जाता है। अस्पतालों में जगह न मिलने के अभाव में लोग इनके अस्पताल में इनकी मुंहमांगी कीमत देकर अपने मरीज का इलाज करवा रहे थे।

इस तरह हुआ था हादसा
पचपेड़ी नाका इलाके में राजधानी नाम के कोविड अस्पताल में 17 मई की दोपहर आग लगी। इसकी वजह अब तक शॉर्ट सर्किट को बताया जा रहा है। प्रारंभिक जांच में अस्पताल में आग बुझाने के कोई इंतजाम, इमरजेंसी एग्जिट और वेंटिलेशन का प्रॉपर इंतजाम नहींं मिला है। रात के वक्त जिला कलेक्टर डॉक्टर एस भारतीदासन और सीनियर SP अजय यादव घटनास्थल पर पहुंच गए थे। हादसे के बाद 19 मरीजों के दूसरे अस्पताल और 10 को यशोदा अस्पताल भेजा गया। हादसे के फौरन बाद मृतकों के परिजनों के लिए सरकार ने 4-4 लाख रुपए का मुआवजा देने का एलान किया है।


हॉस्पिटल पूरी तरह से बंद हो, मृतक के घर वालों को इंसाफ मिले
इस हादसे में अपने भाई को खो चुके प्रिय प्रकाश ने कहा कि आप मेरी जगह रहकर सोचिए मेरे भाई ही पूरा परिवार चलाया करते थे, आज उनके बच्चों को कोई वैसी परवरिश नहीं दे सकता जैसी वो दे सकते थे। मेरा भाई तो लौटाया नहीं जा सकता। मगर लापरवाही से संचालित अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई हो, इसे पूरी तरह से बंद किया जाए। मृतकों के घर वालों को अस्पताल की तरफ से मुआवजा मिलना चाहिए ताकि उन्हें आगे के जीवन के लिए कुछ तो सहारा मिले।