नई दिल्ली, 24 नवंबर। Spiritual Significance : भारतीय विवाह अपनी संस्कृति, मान्यताओं और अनगिनत रस्मों के लिए विश्वभर में विशेष पहचान रखते हैं। इन्हीं रस्मों में मांग भरने की परंपरा सबसे अधिक पवित्र और भावनात्मक मानी जाती है। सात फेरों के बाद दूल्हा जब पहली बार अपनी दुल्हन की मांग में सिंदूर भरता है, तो इसे दांपत्य जीवन की शुरुआत और सुहाग का प्रतीक माना जाता है। लेकिन एक सवाल अक्सर उठता है, आखिर सिंदूर अंगूठी से ही क्यों भरा जाता है?
अंगूठी से सिंदूर भरने के पीछे परंपरा और आध्यात्मिक महत्व
हिंदू मान्यताओं में सिंदूर का लाल रंग शक्ति, ऊर्जा और मंगल का द्योतक माना गया है। यह नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा और दांपत्य जीवन की शुभता का प्रतीक भी है। वहीं, अंगूठी के प्रयोग के पीछे भी गहरा आध्यात्मिक रहस्य बताया जाता है।
1. सोने की अंगूठी का महत्व
अधिकतर यह अंगूठी सोने की होती है। सोना भगवान विष्णु की प्रिय धातु मानी जाती है, और चूँकि दुल्हन को मां लक्ष्मी का रूप माना जाता है, इसलिए सोने की अंगूठी से सिंदूर भरना समृद्धि, सौभाग्य और स्थिरता का आशीर्वाद माना जाता है।
2. गोल आकार अनंत प्रेम का प्रतीक
अंगूठी का गोलाकार आकार पूर्णता, एकता और अनंत रिश्ते का प्रतीक है। जब दूल्हा इसी गोलाकार अंगूठी से मांग भरता है, तो इसे अनंत प्रेम और जीवनभर के साथ का प्रतीक माना जाता है।
3. सौभाग्य और सुरक्षा का विश्वास
मान्यता है कि सोने की अंगूठी से सिंदूर भरने से दांपत्य जीवन में सौहार्द, स्वास्थ्य और खुशहाली बढ़ती है। यह दुल्हन के सुख-समृद्धि और दांपत्य संबंधों की रक्षा का भी प्रतीक है।
सदियों पुरानी परंपरा
यह परंपरा हिंदू समाज में सदियों से चली आ रही है और आज भी उतनी ही आस्था और सम्मान के साथ निभाई जाती है। सिंदूर जहां सुहाग का प्रतीक है, वहीं अंगूठी के माध्यम से इसे धारण कराना प्रेम, विश्वास और शुभकामनाओं का अनंत सूत्र माना गया है।
इस तरह अंगूठी से सिंदूर भरने की परंपरा केवल एक रस्म नहीं, बल्कि एक गहरा धार्मिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व रखने वाली विधि है, जो दंपती के जीवन में सुख, संपन्नता और अनंत प्रेम के संदेश को स्थापित करती है।

