
सुकमा, 07 दिसंबर। Naxalite Couple Surrenders : छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सक्रिय माओवादी नेटवर्क को गंभीर झटका लगा है। दरभा डिवीजन के कुख्यात इंचार्ज और स्पेशल जोनल कमेटी मेंबर जयलाल उर्फ दिरदो विज्जा ने अपनी पत्नी माड़वी गंगी उर्फ विमला के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है। दोनों ने आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले में हथियार डालते हुए सरेंडर किया, जहां सुकमा जिले की पुलिस टीम भी मौजूद रही।
35–40 वर्षों से सक्रिय कुख्यात माओवादी सरेंडर
जयलाल पिछले करीब 40 वर्षों से माओवादी संगठन से जुड़ा हुआ था। बाल संगठन से शुरुआत करने वाला जयलाल संगठन के सबसे खतरनाक और प्रभावी पद एसजेडसीएम (स्पेशल जोनल कमेटी मेंबर) तक पहुंच चुका था। उस पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था। उसकी पत्नी माड़वी गंगी उर्फ विमला पिछले 20 वर्षों से सक्रिय थी और मलंगेर एरिया कमेटी की इंचार्ज रही है। उस पर 8 लाख रुपये का इनाम था।
देश के सबसे बड़े नक्सली हमलों से नाम जुड़ा
दोनों कई बड़े नक्सली हमलों में शामिल थे, जिसमें 2010 का चिंतागुफा ताड़मेटला हमला जिसमें 76 जवान शहीद हुए, 2013 का कांग्रेस परिवर्तन यात्रा यानि झीरम घाटी हमला, 2020 का मिनपा-चिंतागुफा हमला, 2021 का टेकलगुडेम एनकाउंटर, 2024 का टेकलगुडा कैंप हमला और धर्माराम कैंप हमला शामिल हैं। इन सभी घटनाओं में जयलाल ने अहम भूमिका निभाई, जबकि माड़वी गंगी भी कई हथियारबंद ऑपरेशन में शामिल थी।
सुरक्षा बलों की दबाव रणनीति साबित हुई असरदार
सुकमा जिले में DRG, STF, CRPF और COBRA की लगातार आक्रामक कार्रवाई से माओवादियों की कमर टूटती जा रही है। कई शीर्ष माओवादी नेताओं के मारे जाने और संगठन के नेतृत्व संकट ने अंदरूनी असंतोष को बढ़ा दिया था। पुलिस के अनुसार, खोखली सोच, बार-बार होने वाले एनकाउंटर और सरकार की रिहैबिलिटेशन पॉलिसी ने दोनों को सरेंडर करने पर मजबूर कर दिया।
नक्सल नेटवर्क पर भारी असर
सुकमा पुलिस अधीक्षक के मुताबिक, दोनों कई गंभीर आपराधिक मामलों (Naxalite Couple Surrenders) में वांछित थे। इनका आत्मसमर्पण माओवादी नेटवर्क को अंदर से कमजोर करने वाली बड़ी सफलता है। दोनों को छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीति के तहत नकद प्रोत्साहन, सुरक्षा और सहायता प्रदान की जाएगी। यह लोहे की दीवार समझे जाने वाले दरभा डिवीजन पर बड़ा प्रहार माना जा रहा है। नक्सल विरोधी अभियान के लिए यह एक निर्णायक जीत साबित हो सकती है।

