कोलकाता, 10 दिसंबर। Sandeshkhali Case : पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित संदेशखली केस के मुख्य गवाह भोला घोष रविवार को एक गंभीर सड़क हादसे का शिकार हो गए। हादसा बयारमारी के पास बसंती हाईवे पर उस समय हुआ जब उनकी कार एक खाली ट्रक से भिड़ गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि गाड़ी में मौजूद उनके बेटे सत्यजीत घोष और ड्राइवर शाहनूर मोल्ला की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि भोला घोष गंभीर रूप से घायल हैं।
कोर्ट जा रहे थे, लेकिन मामला संदेशखली केस से अलग था
घटना उस समय हुई जब भोला घोष अपने बेटे के साथ बशीरहाट सब-डिविजनल कोर्ट में एक दूसरे मामले की सुनवाई के लिए जा रहे थे। यह यात्रा संदेशखली केस से जुड़ी नहीं थी, लेकिन हादसे का शिकार होने वाला व्यक्ति मुख्य गवाह होने के कारण पूरे क्षेत्र में संदेह और चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
हादसा या साजिश?
स्थानीय लोगों और परिजनों ने इस घटना को साधारण सड़क हादसा मानने से इंकार किया है। सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि क्या यह महज एक दुर्घटना थी या फिर गवाहों को डराने-धमकाने की साजिश। हादसे की टाइमिंग, टारगेट, और घटनास्थल को देखते हुए कई लोग इसे संयोग नहीं मान रहे हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन अभी तक किसी साजिश के प्रमाण सामने नहीं आए हैं।
शाहजहां शेख का विवादित अतीत
संदेशखली केस में आरोपी, तृणमूल कांग्रेस के सस्पेंड नेता शाहजहां शेख पहले से ही जेल में हैं। उस पर एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट टीम पर हमला करने, महिलाओं का यौन उत्पीड़न करने, गैर-कानूनी तरीके से ज़मीन हड़पने और सालों तक राजनीतिक संरक्षण से क्रिमिनल एम्पायर बनाने जैसे आरोप हैं।
बांग्लादेश से मजदूर के रूप में आए शाहजहां का प्रभाव वर्षों में बढ़ा। पहले माकपा, फिर 2012 से टीएमसी से जुड़े। स्थानीय नेताओं की छाया में उनका दबदबा और संपत्ति तेज़ी से बढ़ती गई। 17 कारें, दर्जनों बीघा जमीन और करोड़ों की संपत्ति के चलते वह इलाके में खौफ का दूसरा नाम बन गए थे। उनके दो करीबी सहयोगी शिबू हजरा और उत्तम सरदार भी क्षेत्र में आतंक फैलाने के लिए कुख्यात रहे।
गवाह पर हमला नहीं, पर संयोगों पर उठ रहे प्रश्न
गवाह की कार का इस तरह एक्सीडेंट होना, उसमें उसके बेटे की मौत, और खुद गवाह (Sandeshkhali Case) का गंभीर रूप से घायल होना, इन सबने लोगों के मन में कई संदेह पैदा कर दिए हैं। हालांकि, अभी तक पुलिस ने इस हादसे को सड़क दुर्घटना माना है, लेकिन सार्वजनिक आक्रोश और सवालों को देखते हुए जांच पर नज़रें टिकी हैं।

