नई दिल्ली, 04 जनवरी। Bangladesh Election : बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा के बीच एक प्रमुख हिंदू चेहरे को चुनावी दौड़ से बाहर किए जाने का मामला राजनीतिक विवाद का रूप लेता जा रहा है। बांग्लादेश चुनाव आयोग ने जातीय हिंदू महाजोत के महासचिव और वरिष्ठ अधिवक्ता गोबिंद चंद्र प्रामाणिक का नामांकन रद्द कर दिया है।
गोबिंद चंद्र प्रामाणिक ने 28 दिसंबर को आगामी आम चुनाव के लिए गोपालगंज-3 संसदीय सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया था। यह वही सीट है, जिसे पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पारंपरिक सीट माना जाता है। 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव में हिंदू समुदाय की ओर से प्रामाणिक को एक मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा था।
चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, किसी भी निर्दलीय प्रत्याशी को नामांकन के साथ अपने संसदीय क्षेत्र के कुल मतदाताओं के कम से कम 1 प्रतिशत मतदाताओं के हस्ताक्षर जमा करने होते हैं। प्रामाणिक का दावा है कि उन्होंने सभी आवश्यक हस्ताक्षर समय पर जमा किए थे, लेकिन अंतिम समय में रिटर्निंग ऑफिसर ने इन हस्ताक्षरों को अमान्य घोषित कर दिया।
BNP के दबाव का आरोप
मीडिया से बातचीत में गोबिंद चंद्र प्रामाणिक ने आरोप लगाया कि BNP के इशारे पर हस्ताक्षर करने वाले मतदाता अपने बयान से मुकर गए, जिसके चलते उनका नामांकन रद्द किया गया। उन्होंने कहा कि वह इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगे और जरूरत पड़ने पर अदालत का रुख भी करेंगे।
चुनाव आयोग पर निष्पक्षता के सवाल
इस पूरे मामले पर बांग्लादेश के वरिष्ठ पत्रकार सलाहउद्दीन शोएब चौधरी ने आरोप लगाया कि देश की संस्थाएं BNP को फायदा पहुंचाने की दिशा में काम कर रही हैं। उनके मुताबिक, चुनाव आयोग की कोशिश है कि कोई निर्दलीय, जातीय दल या जमात-ए-इस्लामी का उम्मीदवार चुनाव न जीत सके, ताकि BNP को सीधी चुनौती न मिले।
अल्पसंख्यक राजनीति पर असर
गौरतलब है कि गोबिंद चंद्र प्रामाणिक (Bangladesh Election) लंबे समय से हिंदू संगठनों का प्रमुख चेहरा रहे हैं। शेख हसीना सरकार के पतन के बाद अंतरिम सरकार के प्रमुख डॉक्टर यूनुस के समर्थन को लेकर वह पहले भी विवादों में रहे हैं। बांग्लादेश में कई सीटों पर अल्पसंख्यक मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं, ऐसे में एक प्रमुख हिंदू उम्मीदवार का नामांकन रद्द होना चुनावी निष्पक्षता और लोकतंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

