रायपुर, 06 जनवरी। Land Registry : प्रदेश सरकार जमीन की नई रजिस्ट्री (गाइडलाइन) दरों में कमी कर सकती है। इसको लेकर जिलों में प्राप्त आपत्तियों का परीक्षण किया जा रहा है। बताया गया है कि केन्द्रीय मूल्यांकन समिति एक हफ्ते के भीतर इस पर अंतिम फैसला ले सकती है।
आईजी (रजिस्ट्रेशन) पुष्पेन्द्र मीणा ने मीडिया से चर्चा में बताया कि नई गाइडलाइन दरों को लेकर प्राप्त सुझावों और आपत्तियों पर जिला स्तरीय मूल्यांकन समितियां विचार कर रही हैं। इसके बाद अपनी अनुशंसा केन्द्रीय मूल्यांकन समिति को भेजी जाएगी, जिस पर जल्द निर्णय लिया जाएगा।
सबसे ज्यादा आपत्तियां
जानकारी के मुताबिक जमीन की नई रजिस्ट्री दरों की घोषणा के बाद सबसे ज्यादा आपत्तियां रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और राजनांदगांव जिलों से प्राप्त हुई हैं। इसके अलावा अंबिकापुर, जशपुर, रायगढ़ और कोरबा जिलों में भी गाइडलाइन दरों को लेकर विरोध दर्ज कराया गया है।
गौरतलब है कि सरकार ने सात साल बाद जमीन की गाइडलाइन दरों में बढ़ोतरी की है। कई क्षेत्रों में दरों में एक हजार फीसदी तक की वृद्धि की गई, जिसके बाद व्यापक विरोध सामने आया। इसके चलते सरकार ने संशोधन करते हुए 31 दिसंबर तक आपत्तियां और दावे आमंत्रित किए थे।
आपत्तियों में प्रमुख रूप से दिया यह तर्क
सूत्रों का कहना है कि आपत्तियों में प्रमुख रूप से यह तर्क दिया गया है कि गाइडलाइन दरें जमीन की वास्तविक बाजार कीमत से कहीं अधिक तय कर दी गई हैं। फिलहाल इन आपत्तियों की जांच चल रही है। बताया जा रहा है कि जहां दरें जरूरत से ज्यादा बढ़ी हैं, वहां कम से कम 20 फीसदी तक और कुछ स्थानों पर 100 फीसदी तक भी कमी की जा सकती है।
नई दरों में भारी बढ़ोतरी का असर जमीन के कारोबार पर भी साफ दिख रहा है। रायपुर जैसे जिलों में रजिस्ट्री का काम लगभग ठप पड़ गया है। इस मुद्दे पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल सहित कई विधायकों ने भी असहमति जताई है। बृजमोहन अग्रवाल ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर नई गाइडलाइन दरों को तत्काल प्रभाव से स्थगित करने का आग्रह किया है।
वहीं दूसरी ओर, जमीन कारोबारी भी नई गाइडलाइन दरों के खिलाफ हाईकोर्ट जाने की तैयारी में हैं। इस सिलसिले में कारोबारियों ने राज्यसभा सदस्य एवं सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा से चर्चा की है। बताया गया है कि गाइडलाइन दरों से जुड़े नियमों की समीक्षा की जा रही है। कारोबारियों का आरोप है कि आपत्ति-दावे बुलाए बिना ही दरें लागू कर दी गईं। उनका कहना है कि यदि दरों में संशोधन नहीं हुआ, तो न्यायालय का रास्ता अपनाया जाएगा।

