कांकेर, 10 जनवरी। Teacher Suspension : स्कूल शिक्षा विभाग ने बड़ी और सख्त कार्रवाई करते हुए एक साथ 38 अतिशेष शिक्षकों को निलंबित कर दिया है। हाल के दिनों में यह शिक्षा विभाग की अब तक की सबसे बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई मानी जा रही है। इस फैसले के बाद जिले के शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है और शिक्षकों के बीच अफरा-तफरी का माहौल है।
जानकारी के अनुसार, कांकेर जिले में युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के तहत आवश्यकता से अधिक पाए गए शिक्षकों को अतिशेष घोषित कर अन्य विद्यालयों में नई पदस्थापना दी गई थी। जिला शिक्षा विभाग ने सभी संबंधित शिक्षकों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर नए विद्यालयों में कार्यभार ग्रहण करने के स्पष्ट निर्देश दिए थे।
इसके बावजूद कई शिक्षकों ने नई पदस्थापना पर ज्वाइनिंग नहीं की। विभाग की ओर से बार-बार पत्र जारी किए गए और व्यक्तिगत रूप से भी सूचना दी गई, लेकिन संबंधित शिक्षकों ने न तो कार्यभार ग्रहण किया और न ही कोई संतोषजनक जवाब प्रस्तुत किया। कुछ शिक्षकों ने न्यायालय में याचिका दायर करने की बात कही, लेकिन किसी भी शिक्षक ने स्थगन आदेश (स्टे ऑर्डर) विभाग के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया।
कर्तव्य में घोर लापरवाही
जिला शिक्षा अधिकारी, उत्तर बस्तर कांकेर द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि बिना वैध स्थगन आदेश के पदस्थापना पर ज्वाइनिंग नहीं करना कर्तव्य में घोर लापरवाही है। इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 का उल्लंघन माना गया है। इसी आधार पर 38 अतिशेष शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का निर्णय लिया गया।
जिला शिक्षा अधिकारी रमेश निषाद ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार जुलाई 2025 तक सभी अतिशेष शिक्षकों को नई पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण करना अनिवार्य था। इसके बावजूद आदेशों की अवहेलना किए जाने पर विभाग को अनुशासनात्मक कार्रवाई करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था सुचारू बनाए रखने के लिए विभागीय आदेशों का पालन बेहद जरूरी है।
इस कार्रवाई के बाद शिक्षक संगठनों में चर्चा तेज हो गई है। कुछ शिक्षक इसे कठोर कदम बता रहे हैं, जबकि विभागीय अधिकारियों का कहना है कि प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई जरूरी थी। वहीं, अभिभावकों का मानना है कि युक्तियुक्तकरण के कारण लंबे समय से कई स्कूलों में असमंजस की स्थिति बनी हुई थी, जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही थी।



