तेलंगाना, 14 जनवरी। Unique Story : तेलंगाना के लक्ष्मीपुरम गांव के रहने वाले 80 वर्षीय नक्का इंद्रय्या ने ‘खुद अपनी कब्र खोद ली’ वाली कहावत को शब्दों से निकालकर हकीकत में बदल दिया। मौत से डरने के बजाय उसे सहज रूप से स्वीकार करते हुए उन्होंने जीते-जी अपनी अंतिम मंज़िल खुद तैयार कर ली, ताकि उनके जाने के बाद उनके अपने किसी परेशानी में न पड़ें।
नक्का इंद्रय्या ने यह कदम इसलिए उठाया ताकि उनके निधन के बाद उनके बच्चों को किसी भी तरह की परेशानी न हो। चार बेटों के पिता होने के बावजूद वे अपनी मौत के बाद भी परिवार पर बोझ नहीं बनना चाहते थे। उन्होंने अपने बच्चों को पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि उन्हें उसी कब्र में दफनाया जाए और अंतिम संस्कार का खर्च भी उनके द्वारा बचाए गए पैसों से ही किया जाए।
पत्नी की कब्र के बगल में बनाई अपनी आखिरी मंजिल
नक्का इंद्रय्या ने अपनी कब्र अपनी दिवंगत पत्नी की कब्र के ठीक बगल में बनवाई थी। कंक्रीट और ग्रेनाइट से बनी इस कब्र के ऊपर छत और आसपास एक छोटा सा बगीचा भी था। वे जीते-जी खुद उस बगीचे में लगे पौधों को पानी दिया करते थे।
12 लाख रुपये खर्च कर बनाई मजबूत कब्र
अपनी आखिरी इच्छा को पूरा करने में नक्का इंद्रय्या ने कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने करीब 12 लाख रुपये खर्च कर लगभग 5 फीट गहरी और 6 फीट से अधिक लंबी कब्र बनवाई। इसे पूरी तरह ग्रेनाइट पत्थरों से तैयार कराया गया, ताकि यह लंबे समय तक सुरक्षित रहे। इसके लिए तमिलनाडु से एक विशेष राजमिस्त्री भी बुलाया गया था।
मौत की तैयारी दिखाने के 18 दिन बाद निधन
इस अनोखी कहानी के सामने आने के बाद कुछ दिन पहले ही मीडियाकर्मियों ने नक्का इंद्रय्या से बातचीत की थी। उन्होंने मुस्कुराते हुए अपनी तैयार की गई कब्र और सारी व्यवस्थाएं दिखाई थीं। लेकिन किस्मत का खेल देखिए कि अपनी मौत की तैयारी दिखाने के ठीक 18 दिन बाद, 11 जनवरी को उन्होंने अंतिम सांस ली।
समाज सेवा ही रहा जीवन का उद्देश्य
नक्का इंद्रय्या समाज सेवा को जीवन का उद्देश्य मानते थे। उन्होंने गांव में चर्च, स्कूल और जरूरतमंदों के लिए घर बनवाए। अपनी संपत्ति भी उन्होंने जीते-जी अपने बच्चों में बांट दी थी। मौत के बाद उनकी अंतिम इच्छा के अनुसार उन्हें उसी कब्र में दफनाया गया, जिसे उन्होंने खुद अपने लिए तैयार किया था।
गांव ने नम आंखों से किया विदा
नक्का इंद्रय्या के निधन पर बड़ी संख्या में गांववाले एकत्र (Unique Story) हुए। सभी ने उन्हें एक जिम्मेदार, संवेदनशील और नेक इंसान के रूप में याद किया। आज नक्का इंद्रय्या अपनी पत्नी के बगल में उसी कब्र में आराम कर रहे हैं।

