नई दिल्ली, 15 जनवरी। Medical Ethics : गाजियाबाद के रहने वाले राणा दंपति ने अपने 31 वर्षीय बेटे हरीश राणा को इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) देने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। 12 साल से कोमा में पड़े बेटे की हालत को देखते हुए दायर इस याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट फैसला सुनाएगा।
यह मामला जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ के समक्ष है। इससे पहले 13 जनवरी को दोनों जजों ने हरीश के माता-पिता से कोर्ट चैंबर में मुलाकात कर उनकी स्थिति और पीड़ा को जाना था। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि अंतिम निर्णय से पहले वह परिजनों से मिलकर वस्तुस्थिति को समझना चाहती है।
12 साल से कोमा में है हरीश
हरीश राणा वर्ष 2013 में चंडीगढ़ से बीटेक की पढ़ाई कर रहे थे। 20 अगस्त 2013 को वह चौथी मंजिल से नीचे गिर गए, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई और वह कोमा में चले गए। इसके बाद पीजीआई चंडीगढ़, लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल, राम मनोहर लोहिया अस्पताल और दिल्ली एम्स में इलाज चला, लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं हुआ।
आज हरीश पूरी तरह बिस्तर पर हैं। वह न उठ सकते हैं, न बोल सकते हैं और न ही किसी तरह से अपनी पीड़ा या जरूरत जाहिर कर सकते हैं। उन्हें तरल भोजन पाइप के जरिए दिया जाता है और अन्य आवश्यकताओं के लिए मेडिकल उपकरणों पर निर्भर रहना पड़ता है।
मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट
कोर्ट ने दो अलग-अलग मेडिकल बोर्ड की रिपोर्टों को भी रिकॉर्ड में लिया है। इन रिपोर्टों में साफ कहा गया है कि हरीश के ठीक होने की संभावना न के बराबर है और उनकी स्थिति अपरिवर्तनीय है।
परिवार की आर्थिक स्थिति बदहाल
बेटे के इलाज के लिए पिता को अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी और घर तक बेचना पड़ा। अब हालात ऐसे हो गए हैं कि नर्स का खर्च उठाना भी परिवार के लिए संभव नहीं रह गया है। माता-पिता का कहना है कि जिस बेटे से उन्हें सहारा मिलने की उम्मीद थी, वही अब पूरी तरह उन पर निर्भर है।
राणा दंपति इससे पहले भी 2018 और 2023 में सुप्रीम कोर्ट से इच्छामृत्यु की अनुमति मांग चुके हैं, लेकिन दोनों बार उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी।
क्या है इच्छामृत्यु
इच्छामृत्यु का मतलब किसी व्यक्ति की इच्छा या उसके हित में मृत्यु को अनुमति देना है। एक्टिव यूथेनेशिया में डॉक्टर दवा या इंजेक्शन देकर मृत्यु देते हैं, जो भारत में अवैध है। पैसिव यूथेनेशिया में जीवनरक्षक उपचार या सपोर्ट सिस्टम को हटाने की अनुमति दी जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2018 में कुछ शर्तों के साथ पैसिव यूथेनेशिया को वैध ठहराया था।
अब पूरे देश की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि राणा दंपति की वर्षों पुरानी पीड़ा को राहत मिलेगी या नहीं।

