नई दिल्ली, 20 जनवरी। Badminton Legend : भारतीय बैडमिंटन की दिग्गज और देश में इस खेल की पहचान बनाने वाली शख्सियत साइना नेहवाल ने अपने 21 साल लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर के बाद संन्यास का ऐलान कर दिया है।
साइना ने अपने घुटनों की गंभीर चोट और रिकवरी न हो पाने की स्थिति को अपने संन्यास का कारण बताया। उन्होंने यह घोषणा किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस या सोशल मीडिया पोस्ट के बजाय पॉडकास्ट के माध्यम से की। साइना ने कहा, मैंने हमेशा चोटों से लड़कर वापसी की है, लेकिन इस बार शरीर ने साफ संकेत दे दिए।
चोटों से जंग और मजबूरी की विदाई
साइना के घुटने की चोटों ने कई बार उनके करियर को प्रभावित किया। रियो 2016 ओलंपिक से पहले लगी चोट ने उन्हें लंबे समय तक मैदान से बाहर रखा। हालांकि 2017-2018 में उन्होंने शानदार वापसी की, जिसमें कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड और विश्व चैम्पियनशिप ब्रॉन्ज शामिल हैं। साइना ने अपने आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच सिंगापुर ओपन 2023 में खेला। इसके बाद लगातार चोटों और सर्जरी की सलाह ने उनकी वापसी की संभावना को लगभग खत्म कर दिया।
साइना का करियर
साइना नेहवाल ने अपने करियर में कई ऐसे मुकाम हासिल किए जो भारतीय एथलीटों के लिए दुर्लभ थे। इसमें लंदन ओलंपिक्स 2012: बैडमिंटन में भारत का पहला ओलंपिक मेडल (कांस्य), वर्ल्ड नंबर 1 रैंकिंग हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला, 10 सुपर सीरीज खिताब, 24 अंतरराष्ट्रीय खिताब, वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडल, कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड शामिल है।
उनकी उपलब्धियों ने पीवी सिंधु, किदांबी श्रीकांत और एचएस प्रणॉय जैसे खिलाड़ियों के लिए मार्ग प्रशस्त किया। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सिंधु ने भारतीय बैडमिंटन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, तो इसके पीछे की प्रेरणा साइना की कहानी और संघर्ष ही रही।
एक प्रेरक विरासत
साइना केवल एक खिलाड़ी नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने भारतीय बैडमिंटन में आत्मविश्वास, महत्वाकांक्षा और प्रेरणा की नई दिशा दी। उनके करियर और उपलब्धियों ने एक पूरी पीढ़ी को रैकेट उठाने की प्रेरणा दी। आज भारत की हर बड़ी बैडमिंटन अकादमी में छोटे-छोटे खिलाड़ी उनके खेल की कहानी से प्रेरित हैं। साइना ने अपने करियर में न केवल व्यक्तिगत उपलब्धियां हासिल कीं, बल्कि भारत के लिए बैडमिंटन की पहचान और गौरव भी स्थापित किया।

