लंदन, 23 जनवरी। Dog Poop Scooper : ब्रिटेन के डर्बीशायर के रहने वाले काइल न्यूबी ने एक ऐसा अनोखा बिजनेस शुरू किया है, जिससे वह कुत्तों की पॉटी उठाकर हर साल लगभग 32,000 डॉलर (करीब 30 लाख रुपये) की कमाई कर रहे हैं। 39 वर्षीय काइल ने इस काम की शुरुआत साउथ वेस्ट न्यूज सर्विस को दिए अपने इंटरव्यू में की। उनका मानना है कि यह एक बेहतरीन अतिरिक्त कमाई का जरिया है, जिसे वे पार्ट-टाइम काम के रूप में कर रहे हैं।
फेसबुक पर किया विज्ञापन पोस्ट
न्यूबी ने बताया कि उन्होंने मार्च में पेट पू पिक नामक इस व्यवसाय की शुरुआत की, जब उन्होंने अमेरिका में यह देखा कि कुत्तों की गंदगी साफ करने का काम वहां कितना लोकप्रिय हो चुका है। इसे देखकर उन्होंने सोचा कि क्यों न इसे ब्रिटेन के ईस्ट मिडलैंड्स में आजमाया जाए। इस विचार के बाद उन्होंने फेसबुक पर एक विज्ञापन पोस्ट किया, और यह विज्ञापन लोगों में इतनी दिलचस्पी पैदा कर गया कि कुछ ही समय में उनके पास 35 नियमित ग्राहक आ गए।
हफ्ते में दो दिन करता है काम
काइल अब प्रत्येक बुधवार को 15 ग्राहकों और शनिवार को 20 ग्राहकों को कुत्तों की गंदगी साफ करने की सेवा प्रदान करते हैं। वे पहले सर्विस के लिए 40 डॉलर (करीब 3,200 रुपये) लेते हैं और उसके बाद प्रति सप्ताह 20 डॉलर (1,600 रुपये) की फीस चार्ज करते हैं। काइल का अनुमान है कि वह इस काम से हर हफ्ते लगभग 2,680 डॉलर (लगभग 2 लाख 36 हजार रुपये) की कमाई करते हैं, जो कि लगभग 60 डॉलर प्रति घंटे के बराबर है।
गंदे काम में अच्छा मुनाफा
न्यूबी का कहना है कि हर बगीचे से लगभग 14 गोबर के टुकड़े उठाने होते हैं और एक बगीचे को साफ करने में उन्हें लगभग 10-15 मिनट का समय लगता है। इसके बाद, कुत्ते की पॉटी को उचित तरीके से ठिकाने लगाने के लिए वह 50 मील तक की दूरी तय करते हैं। इसके अलावा, वह अपने उपकरणों को कीटाणुरहित भी करते हैं ताकि किसी तरह का कोई बैक्टीरिया न रहे।
न्यूबी ने यह भी कहा कि उनके अधिकतर ग्राहक ऐसे लोग हैं, जो उम्रदराज हैं या शारीरिक रूप से कमजोर हैं और वे खुद कुत्ते की गंदगी साफ नहीं कर सकते। इनमें से कई ग्राहक बैसाखियों के सहारे चलते हैं। एक 48 वर्षीय ग्राहक, पीटर फिस्क, ने दिसंबर में इस सेवा का उपयोग करना शुरू किया था, क्योंकि पैर टूटने के कारण वह कुत्ते की पॉटी उठाने में असमर्थ थे।
काइल के काम से कई लोग हैरान हैं, लेकिन उनका मानना है कि यह एक ज़रूरी सेवा है जो कई बुजुर्गों और विकलांगों के लिए बेहद सहायक साबित हो रही है।

