रायपुर, 10 मार्च। Nari Shakti : अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के महिला प्रभाग द्वारा विधानसभा मार्ग स्थित शांति सरोवर रिट्रीट सेंटर में महिला जागृति आध्यात्मिक सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का विषय था- ‘वंदे मातरम् से स्वर्णिम भारत’।

महिला शक्ति के जागरण का संदेश
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी कौशल्या देवी साय, बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा, पुलिस महानिदेशक की धर्मपत्नी ज्योति गौतम, पुलिस अधीक्षक (आईपीएस) श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा, रायपुर सेवाकेन्द्र की संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी, भाजपा प्रवक्ता शताब्दी पांडे तथा बीके रश्मि दीदी ने दीप प्रज्वलित कर किया।
मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी कौशल्या देवी साय ने कहा कि बच्चे का पहला गुरु माता-पिता होते हैं। यदि बचपन से ही बच्चों को सही मार्गदर्शन दिया जाए तो उनका भविष्य उज्ज्वल बनता है। उन्होंने कहा कि जीवन को कठिन नहीं बल्कि सहज बनाकर जीना चाहिए और भौतिकता से दूर रहकर साधना की आवश्यकता है। उन्होंने महिलाओं से राजयोग को जीवन में अपनाने और बेटियों को अच्छी शिक्षा देने की अपील की। साथ ही उन्होंने जुलाई में माउंट आबू स्थित ब्रह्माकुमारी आश्रम का दौरा करने की घोषणा भी की।
बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि मातृशक्ति को आगे बढ़ाने के लिए उनका शिक्षित होना आवश्यक है। शिक्षा हमें डिग्री और आर्थिक साधन देती है, लेकिन आध्यात्मिक ज्ञान आत्मबोध कराता है। योग विद्या के माध्यम से आत्मा और परमात्मा का ज्ञान प्राप्त कर जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है।
रायपुर सेवाकेन्द्र की संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने कहा कि आज नारी अबला नहीं, सबला बन चुकी है। उन्होंने बताया कि ब्रह्माकुमारी संस्थान विश्व की ऐसी संस्था है जिसका संचालन मातृशक्ति द्वारा किया जाता है। उन्होंने महिलाओं से राजयोग का अभ्यास करने और आत्मचिंतन के लिए समय निकालने का आह्वान किया।
पुलिस महानिदेशक की धर्मपत्नी ज्योति गौतम ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि राजयोग सीखने से उनके जीवन में शांति आई और भय व चिंता समाप्त हो गई। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता अपनाकर ही हम स्वर्णिम भारत के निर्माण में योगदान दे सकते हैं।

नारी जागृति से बनेगा स्वर्णिम भारत
पुलिस अधीक्षक (आईपीएस) श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा ने कहा कि सनातन धर्म में महिला और पुरुष को समान दर्जा प्राप्त है। परिवार में बच्चों को संस्कार देने में माताओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, इसलिए महिलाओं की शिक्षा अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 जैसे कठिन समय ने यह सिद्ध कर दिया कि संकट की घड़ी में आध्यात्मिक साधना ही सबसे बड़ा सहारा बनती है।
भाजपा प्रवक्ता शताब्दी पांडे ने कहा कि राजयोग के अभ्यास से व्यक्ति के स्वभाव में सकारात्मक परिवर्तन आता है और आंतरिक शक्तियाँ जागृत होती हैं।
इस अवसर पर राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी रश्मि दीदी ने विषय को स्पष्ट करते हुए कहा कि महान व्यक्तित्वों के निर्माण में महिलाओं की अहम भूमिका होती है। नारी परिवार की धुरी है और वह घर को स्वर्ग बनाने की क्षमता रखती है।
कार्यक्रम के दौरान नगर के बाल कलाकारों ने नारी शक्ति के महत्व को दर्शाते हुए आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन ब्रह्माकुमारी अदिति दीदी ने किया।


