नई दिल्ली, 26 मई। Alka Lamba Convicted : अलका लांबा को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 2024 में जंतर-मंतर पर हुए महिला आरक्षण प्रदर्शन मामले में दोषी करार दिया है। अदालत ने माना कि निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च किया, बैरिकेड तोड़े और पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डाली। मामले में अब 4 जून को सजा पर सुनवाई होगी।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 29 जुलाई 2024 का है, जब महिला कांग्रेस द्वारा महिला आरक्षण और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार उस समय इलाके में बीएनएसएस की धारा 163 लागू थी, बावजूद इसके प्रदर्शनकारियों ने संसद घेराव की कोशिश की।
अदालत में पेश वीडियो फुटेज और पुलिस गवाहों के आधार पर कोर्ट ने माना कि प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों को धक्का दिया गया, बैरिकेड पार किए गए और सार्वजनिक मार्ग को बाधित किया गया। कोर्ट ने कहा कि अलका लांबा प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने के लिए उकसा रही थीं।
इन धाराओं में दोषी करार
अदालत ने अलका लांबा को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत दोषी पाया है। इन धाराओं में सरकारी कर्मचारी को उनके कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा डालना, पुलिस कार्रवाई में हस्तक्षेप करना, सरकारी आदेश की अवहेलना करना और सार्वजनिक मार्ग को अवरुद्ध करना जैसे आरोप शामिल हैं। इस मामले में, उन्हें अधिकतम दो साल तक की सज़ा हो सकती है।
कोर्ट के फैसले पर क्या बोलीं अलका लांबा?
फैसले के बाद अलका लांबा ने (Alka Lamba Convicted) कहा कि उन्हें इस फैसले की उम्मीद थी। उन्होंने दावा किया कि वे महिलाओं की सुरक्षा और आरक्षण की मांग को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन कर रही थीं। उन्होंने कहा कि, महिलाओं की आवाज उठाना अगर अपराध है, तो मैं डरने वाली नहीं हूं।

