रायपुर, 30 नवंबर। Margashirsha Purnima 2025 : हिंदू पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष पूर्णिमा इस वर्ष 4 दिसंबर को मनाई जाएगी। इसके साथ ही मार्गशीर्ष मास का समापन और पौष माह की शुरुआत भी होगी। ज्योतिषविदों के अनुसार यह पूर्णिमा कई विशेष योग लेकर आ रही है, जिनमें रवि योग का निर्माण प्रमुख है। यह वर्ष की अंतिम पूर्णिमा भी है, जिसके कारण इसका महत्व और बढ़ गया है।
ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी में स्नान, दान-पुण्य और देवी लक्ष्मी की आराधना से मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं। इस वर्ष बनने वाले शुभ योगों के कारण यह तिथि विशेष फलदायी मानी जा रही है।
कितने बजे रहेगा ब्रह्म मुहूर्त?
मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन 4 दिसंबर को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:19 बजे से 4:58 बजे तक रहेगा। लगभग 39 मिनट का यह शुभ समय साधना, मंत्र-जाप और पूजा के लिए अत्यंत उत्तम माना गया है। मान्यता है कि इस समय देवी लक्ष्मी की आराधना से धन-धान्य में वृद्धि और समृद्धि प्राप्त होती है।
मां लक्ष्मी के दिव्य मंत्र
ज्योतिषविदों ने ब्रह्म मुहूर्त में माता लक्ष्मी के इन पांच मंत्रों के जाप को अत्यंत शुभ बताया है-
- कमला मंत्र:
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥ - अष्ट लक्ष्मी मंत्र:
ॐ आदिलक्ष्म्यै नमः, ॐ धनलक्ष्म्यै नमः - धन प्राप्ति मंत्र:
ॐ ह्रीं श्री क्रीं क्लीं श्री लक्ष्मी मम गृहे धन पूरये, धन पूरये, चिंताएं दूरये-दूरये स्वाहा: - महालक्ष्मी मंत्र:
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः॥ - वैभव लक्ष्मी मंत्र:
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नमः॥
पूर्णिमा पर रवि योग का संयोग
4 दिसंबर को रवि योग का शुभ संयोग सुबह 6:59 बजे से दोपहर 2:54 बजे तक रहेगा। इस योग में दान-पुण्य, पूजा-पाठ और शुभ कार्य करने से विशेष लाभ मिलने की मान्यता है।
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि इस दिन जरूरतमंदों को गुड़, तिल, घी, कंबल, भोजन सामग्री या सामर्थ्य अनुसार धन का दान करने से पुण्य फल प्राप्त होता है।
पंडितों के अनुसार वर्ष की आखिरी पूर्णिमा शुभ फल देने वाली मानी गई है। ऐसे में श्रद्धालु ब्रह्म मुहूर्त और रवि योग का लाभ उठाकर पूजा-पाठ और दान से अपने जीवन में सकारात्मकता और समृद्धि बढ़ा सकते हैं।

