लखनऊ, 13 दिसंबर। New State President : भारतीय जनता पार्टी को आज उत्तर प्रदेश में नया प्रदेश अध्यक्ष मिल सकता है। प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के लिए आज नामांकन की प्रक्रिया होनी है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी का नाम लगभग तय माना जा रहा है। अगर उनके अलावा किसी अन्य उम्मीदवार का नामांकन नहीं होता है, तो आज ही उनके नाम पर मुहर लग सकती है।
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पंकज चौधरी के प्रस्तावक होंगे। बताया जा रहा है कि दोपहर 2 बजे तक उनके नाम का अनौपचारिक ऐलान भी हो सकता है। पार्टी के अंदर यह भी चर्चा है कि अन्य किसी नेता के नामांकन की संभावना बेहद कम है, जिससे चुनाव की स्थिति बनने के आसार नहीं हैं।
हालांकि प्रदेश अध्यक्ष की औपचारिक घोषणा बीजेपी रविवार को करेगी। रविवार दोपहर 12 बजे लखनऊ के एक बड़े सभागार में आयोजित कार्यक्रम में इसकी घोषणा होगी। इसी कार्यक्रम में राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नाम का भी ऐलान किया जाएगा। इसके चलते आज अधिकांश सांसद लखनऊ में मौजूद रहेंगे, जिन्हें राष्ट्रीय परिषद के नामांकन के लिए बुलाया गया है।
पंकज चौधरी के अलावा केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा और पूर्व सांसद निरंजन रंजन ज्योति के नाम भी चर्चा में रहे हैं, लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि इन नेताओं के नामांकन की संभावना फिलहाल बेहद कम है।
ओबीसी चेहरे पर बीजेपी का फोकस
बीजेपी ने इस बार प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए ओबीसी चेहरे को आगे करने का मन बना लिया है। पंकज चौधरी ओबीसी वर्ग की कुर्मी बिरादरी से आते हैं और वे सात बार सांसद रह चुके हैं। ऐसे में अगर उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाता है, तो यह पार्टी की सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
गौरतलब है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को ओबीसी, खासकर कुर्मी समाज की नाराजगी का सामना करना पड़ा था। पंकज चौधरी के जरिए पार्टी इस वर्ग को फिर से अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रही है।
अगर पंकज चौधरी प्रदेश अध्यक्ष बनते हैं, तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष दोनों ही पूर्वांचल से होंगे। योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से आते हैं, जबकि पंकज चौधरी महाराजगंज से हैं, जो एक-दूसरे से सटे जिले हैं। इसे लेकर जहां एक ओर संगठनात्मक मजबूती की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय संतुलन को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।

