
देहरादून/नैनीताल, 19 दिसंबर। Anupama Gulati Case : अपनी ही पत्नी अनुपमा गुलाटी का शव 72 टुकड़ों में काटने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर राजेश गुलाटी को नैनीताल हाई कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है। राजेश ने इस फैसले को चुनौती दी थी, लेकिन हाई कोर्ट ने उसकी हैवानियत को देखते हुए कोई राहत देने से साफ इंकार कर दिया।
प्रेम से हत्या तक का दर्दनाक सफर
राजेश और अनुपमा की प्रेम कहानी 1992 में शुरू हुई थी। 7 साल के अफेयर के बाद 10 फरवरी 1999 को दोनों ने शादी की। वर्ष 2000 में वे अमेरिका शिफ्ट हो गए, लेकिन घरेलू झगड़ों के कारण अनुपमा 2003 में भारत लौट आई। दो साल बाद राजेश ने उसे वापस अमेरिका ले जाकर शादी निभाई और दोनों के जुड़वा बच्चे हुए।
17 अक्टूबर 2010 की खौफनाक रात
अमेरिका से देहरादून लौटने के बाद झगड़े बढ़ गए। बात घरेलू हिंसा और प्रोटेक्शन एजेंट तक पहुंच गई थी, जिस वजह से राजेश को हर महीने अनुपमा को 20000 हरुपये देने का आदेश दिया गया था, लेकिन उसने केवल एक माह का भुगतान किया। 17 अक्टूबर 2010 की रात मामूली झगड़े के दौरान राजेश ने अनुपमा को जोर से थप्पड़ मारा, उसका सिर दीवार से टकराया और जब वह बेहोश हुई तो उसने उसका गला घोंट दिया।
शव को 72 टुकड़ों में काट कर नष्ट करने की दहशत
हत्या के बाद राजेश ने बाजार से इलेक्ट्रिक आरी (Anupama Gulati Case) और बड़ा डीप फ्रीजर खरीदा। उसने शव के 72 टुकड़े कर मांस को प्लास्टिक बैग में डालकर फ्रीजर में छिपाया। महीनों तक वह धीरे-धीरे शव के टुकड़े मसूरी डायवर्जन के पास नाले में फेंकता रहा।नैनीताल हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि इस भीषण और योजना बद्ध हत्या के लिए कोई भी राहत या रियायत नहीं दी जा सकती।

