रायपुर/महासमुंद, 23 फरवरी। Naxalite Surrender : छत्तीसगढ़ में सक्रिय प्रतिबंधित संगठन Communist Party of India (Maoist) से जुड़े 15 सदस्यों ने आत्मसमर्पण की इच्छा जताते हुए राज्य सरकार से सुरक्षा गारंटी की मांग की है। संगठन के कथित प्रतिनिधि ‘विकास’ की ओर से जारी पत्र में गृह मंत्री से रेडियो के माध्यम से सुरक्षा आश्वासन देने का आग्रह किया गया है।
पत्र में कहा गया है कि बदलते सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों में ‘दीर्घकालीन जनयुद्ध’ जारी रखने का औचित्य नहीं रह गया है। संविधान के दायरे में रहकर मुख्यधारा में काम करने को बेहतर विकल्प बताया गया है। समूह ने संकेत दिया है कि 2-3 मार्च तक बाहर आने की तैयारी है और महासमुंद जिले में आत्मसमर्पण करने की योजना है।
आत्मसमर्पण से पहले कुछ आशंका के साथ रखी ये शर्त
लेटर में सरेंडर के लिए चिंताएं और शर्तें भी बताई गई थीं, जिसमें यह चिंता भी शामिल थी कि सरेंडर करने वालों को घर भेजने के बजाय कैंप या बैरक में रखा जा सकता है और बाद में क्रिमिनल केस में फंसाया जा सकता है। मीडिया में इस फैसले के सामने आने के बाद भी कथित कॉम्बिंग और फायरिंग को लेकर सवाल बने हुए हैं। ओडिशा के बलांगीर-बरगढ़ और छत्तीसगढ़ बॉर्डर इलाकों में कॉम्बिंग ऑपरेशन रोकने की रिक्वेस्ट की गई है।
समूह ने यह भी कहा है कि अलग-अलग नहीं, बल्कि पूरे पार्टी स्तर पर निर्णय होने पर अधिक लोग मुख्यधारा में आएंगे। तीन बिंदुओं, माओवादी संगठन को राजनीतिक मान्यता, दर्ज मामलों की वापसी व जेल में बंद कैदियों की रिहाई, तथा संविधान के दायरे में खुलकर काम करने की अनुमति पर सरकार से घोषणा की अपील की गई है।
सरकार की ओर से आधिकारिक पुष्टि शेष
इस पत्र की आधिकारिक पुष्टि संबंधित सुरक्षा एजेंसियों या राज्य सरकार की ओर से नहीं हुई है। राज्य में पहले भी माओवादी कैडरों के आत्मसमर्पण के मामले सामने आते रहे हैं, जिनमें सरकार की पुनर्वास नीति के तहत सहायता दी जाती है। सुरक्षा एजेंसियां पत्र की सत्यता और परिस्थितियों की जांच में जुटी हैं। आगे की कार्रवाई सरकार के निर्देश और सुरक्षा मूल्यांकन के आधार पर तय होगी।
उपमुख्यमंत्री ने किया आश्वस्त
इधर, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने नक्सलियों से हिंसा (Naxalite Surrender) का रास्ता छोड़कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होने और सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जो भी मुख्यधारा में आना चाहता है, सरकार उसकी सुरक्षा और पुनर्वास के लिए प्रतिबद्ध है।

