Bihaan CG : सेंट्रिंग प्लेट के व्यवसाय से बढ़ा महिलाओं में आत्मविश्वास और आय, ‘बिहान’ से सशक्त हो रहीं धमतरी जिले की ग्रामीण महिलाएं

Bihaan CG : सेंट्रिंग प्लेट के व्यवसाय से बढ़ा महिलाओं में आत्मविश्वास और आय, ‘बिहान’ से सशक्त हो रहीं धमतरी जिले की ग्रामीण महिलाएं

रायपुर, 12 मार्च। Bihaan CG : राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन “बिहान” ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम बनता जा रहा है। इस योजना के माध्यम से प्रदेश की महिलाएं स्वसहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर रही हैं।  “बिहान” का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को संगठित कर उन्हें स्वरोजगार, कौशल प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है, ताकि वे आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनकर आत्मसम्मान के साथ जीवन यापन कर सकें।

धमतरी जिले में “बिहान” योजना के अंतर्गत 58 महिला सदस्यों को सेंट्रिंग प्लेट निर्माण एवं किराये के व्यवसाय के लिए ऋण उपलब्ध कराया गया है। इनमें धमतरी विकासखंड की 27, कुरूद की 15, मगरलोड की 7 तथा नगरी विकासखंड की 9 महिलाएं शामिल हैं। इन समूहों को प्रकरण तैयार कर आरएफ मद से 15 हजार रुपये, सीआईएफ से 60 हजार रुपये तथा बैंक ऋण के रूप में 3 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई। प्राप्त राशि से महिलाओं के समूहों ने 59 हजार 300 वर्गफीट सेंट्रिंग प्लेट की खरीदी की है। इन प्लेटों को महिलाएं प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) सहित अन्य शासकीय निर्माण कार्यों और स्थानीय बाजार में 20 से 25 रुपये प्रति वर्गफीट के किराये पर उपलब्ध करा रही हैं। इससे उन्हें नियमित रूप से अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है।

समूह की महिलाओं ने न केवल स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाया है, बल्कि नियमित बचत करते हुए समय पर ऋण की अदायगी भी कर रही हैं। इससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है और समाज में उनकी प्रतिष्ठा भी बढ़ी है।

ग्रामीण गरीबी की चुनौती को दूर करने के लिए आजीविका को बढ़ावा देना है ताकि वे गरीबी से बाहर आ सकें। जिला पंचायत धमतरी द्वारा इन स्व-सहायता समूहों को आर्थिक सहयोग के साथ तकनीकी मार्गदर्शन भी प्रदान किया गया है, जिससे महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है। “बिहान” से जुड़कर महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं और अपने परिवार तथा समाज के लिए प्रेरणा बन रही हैं। यह पहल दर्शाती है कि जब महिलाएं संगठित होकर कार्य करती हैं, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा और विकास की संभावनाएं स्वतः खुल जाती हैं।

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