उज्जैन, 24 अगस्त। Ujjain Cow Rabies News : मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के घोंसला तहसील के रूदाहेड़ा गांव में गाय की मौत के बाद एक परिवार में रैबीज को लेकर चिंता बढ़ गई। परिवार के अनुसार करीब सात दिन पहले उनकी गाय को एक कुत्ते ने काट लिया था। इसके कुछ दिनों बाद गाय के व्यवहार में बदलाव दिखाई देने लगा और शनिवार को उसकी मौत हो गई।
गाय के मालिक विष्णुलाल के परिवार के सदस्य पिछले कुछ दिनों से इसी गाय का दूध पी रहे थे। गाय की मौत की जानकारी के बाद परिवार के 10 सदस्य रविवार सुबह उपचार और चिकित्सकीय सलाह के लिए चरक भवन अस्पताल पहुंचे।
कुत्ते के काटने के बाद बदला गाय का व्यवहार
परिवार के मुताबिक करीब सात दिन पहले रूदाहेड़ा गांव में एक कुत्ते ने गाय को काट लिया था। इसके बाद गाय करीब तीन दिनों से असामान्य व्यवहार कर रही थी। शनिवार दोपहर गाय की मौत हो गई। इसके बाद परिवार के सदस्यों को रैबीज संक्रमण की आशंका हुई और उन्होंने अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकों से सलाह ली।
10 परिवार सदस्यों को लगाए गए इंजेक्शन
अस्पताल में चिकित्सकों ने परिवार के सदस्यों की जानकारी और स्थिति का आकलन करने के बाद उन्हें रैबीज से बचाव के इंजेक्शन लगाए।इंजेक्शन लगवाने वालों में विष्णुलाल, ताराचंद, हरिशंकर, शांताबाई, संध्या, शिवम, सुमित, भविष्य, संगीता और हंसबाई शामिल हैं।
क्या दूध पीने से रैबीज फैलता है?
इस मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि सिर्फ रैबीज संक्रमित पशु का दूध पीने से रैबीज फैलने का कोई प्रयोगशाला या महामारी-विज्ञान संबंधी प्रमाण नहीं है। हालांकि, रैबीज संक्रमित पशु की लार के संपर्क से संक्रमण का खतरा हो सकता है। ऐसे मामलों में चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। राष्ट्रीय रैबीज नियंत्रण कार्यक्रम के मुताबिक रैबीज से संभावित एक्सपोजर की स्थिति में डॉक्टर की सलाह के अनुसार पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PEP) दी जाती है।
परिवार ने एहतियात के तौर पर उठाया कदम
गाय की मौत और उसके पहले दिखाई दिए असामान्य व्यवहार के बाद परिवार ने जोखिम नहीं लिया और अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह ली। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर परिवार के किसी सदस्य में रैबीज संक्रमण की पुष्टि की बात सामने नहीं आई है। अगर किसी व्यक्ति को कुत्ते या किसी संदिग्ध संक्रमित पशु ने काटा या खरोंचा है, तो घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट धोना और जल्द से जल्द स्वास्थ्य केंद्र पहुंचना जरूरी है।

