बिलासपुर, 04 सितंबर। Ratanlal Dangi Case: महिला उत्पीड़न से जुड़े मामले में निलंबित आईपीएस अधिकारी रतनलाल डांगी के खिलाफ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। पुलिस विभाग की ओर से निर्धारित समय में जवाब पेश नहीं किए जाने पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर शपथपत्र के साथ जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा में जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया तो मामले के ऑफिसर-इन-चार्ज को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से कोर्ट के समक्ष उपस्थित होना होगा। मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
योगा टीचर ने लगाए गंभीर आरोप
याचिका के अनुसार, शिकायतकर्ता एक योगा टीचर हैं। उनका आरोप है कि तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) रतनलाल डांगी ने व्यस्तता का हवाला देते हुए वीडियो कॉल के माध्यम से उनसे योग सीखना शुरू किया था। पीड़िता का आरोप है कि कुछ समय बाद उनके व्हाट्सऐप नंबर पर कथित तौर पर अश्लील संदेश भेजे जाने लगे। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि वीडियो कॉल के दौरान कथित रूप से अश्लील व्यवहार किया गया।
शिकायतकर्ता के अनुसार, विरोध करने पर उन्हें और उनके परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी गई। साथ ही उनके पति के खिलाफ झूठा आपराधिक मामला दर्ज कराने की कथित धमकी का भी आरोप लगाया गया है।
DGP के समक्ष की गई थी शिकायत
पीड़िता ने इस मामले में 15 अक्टूबर 2025 को पुलिस महानिदेशक (DGP) के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की थी। इसके बाद मामले की जांच के लिए आईपीएस अधिकारी आनंद छाबड़ा और मिलना कुर्रे को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया। इसके बाद पीड़िता ने 20 अप्रैल 2026 को केंद्र सरकार के गृह विभाग के सचिव और छत्तीसगढ़ शासन के गृह विभाग के सचिव के समक्ष भी शिकायत प्रस्तुत की।
शिकायत पर उचित कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए पीड़िता ने अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय और ऋषभदेव साहू के माध्यम से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की।
जांच अधिकारियों की भूमिका पर भी उठाए सवाल
हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि शिकायत की जांच ऐसे अधिकारियों से कराई जा रही है, जिनकी भूमिका को लेकर पहले ही आपत्ति जताई जा चुकी है। याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि जांच अधिकारी आरोपी अधिकारी को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। याचिका में IG आनंद छाबड़ा को जांच की जिम्मेदारी दिए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, ये सभी आरोप याचिकाकर्ता की ओर से लगाए गए हैं और मामले में जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया जारी है।
कथित संपत्तियों की जांच की भी मांग
पीड़िता ने अपनी शिकायत में रतनलाल डांगी से संबंधित कथित चल-अचल संपत्तियों की जांच और आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की मांग भी की है। शिकायत में रायपुर, धरमपुरा, राजिम, कटघोरा और बिलासपुर सहित राजस्थान के विभिन्न स्थानों पर कथित संपत्तियों का उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि जांच अधिकारियों ने इन बिंदुओं की उचित जांच नहीं की।
12 अगस्त को मांगा था जवाब, 2 सितंबर को कोर्ट नाराज
मामले में 12 अगस्त 2026 को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मामले को संवेदनशील मानते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा था। इसके बाद 2 सितंबर 2026 को हुई सुनवाई में पुलिस विभाग की ओर से जवाब प्रस्तुत नहीं किए जाने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई।
हाईकोर्ट ने अब वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर शपथपत्र के साथ जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। यदि निर्धारित अवधि में जवाब दाखिल नहीं किया गया तो ऑफिसर-इन-चार्ज को 29 सितंबर 2026 को कोर्ट के समक्ष उपस्थित होना होगा। लिहाजा अब मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर 2026 को होगी।

