कोरोना के बीच तेलंगाना सरकार ने IAS अफसरों के लिए खरीदीं 25-25 लाख की गाड़ियां, छिड़ा विवाद

नई दिल्ली, 14 जून। कोरोना महामारी के बीच तेलंगाना में आईएएस अधिकारियों को लग्जरी गाड़िया खरदीकर देने के लिए सरकार की आलोचनी की जा रही है। अतिरिक्त कलेक्टरों को देने के लिए 32 लग्जरी गाड़ियों को रविवार को प्रगति भवन पहुंचाया गया। कम राजस्व और मेडिकल के बुनियादी ढांचे की खस्ता हालत के कारण राज्य के खजाने की हालत बेहद खराब है। लेकिन इसके बावजूद भी सरकार ने इन गाड़ियों को खरीदा। बता दें कि प्रत्येक गाड़ी की कीमत 25 लाख रुपये है। विपक्ष ने तेलंगाना सरकार के इस कदम की भारी आलोचना की है। विपक्ष के नेताओं ने कहा कि कोरोना संकट के दौरान इस पैसे का इस्तेमाल बेड का विस्तार करने या गरीबों का मुफ्त इलाज के लिए करना चाहिए था। विपक्ष के नेताओं ने कहा कि यह तेलंगाना सरकार का “गैर-जिम्मेदाराना” कदम है।
तेलंगाना सरकार के इस कदम की आलोचना करते हुए, भाजपा के प्रवक्ता कृष्ण सागर राव ने ‘नौकरशाहो को खुश करने के लिए’ मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव द्वारा की गई ‘सार्वजनिक खजाने की लूट’ के खिलाफ अपनी पार्टी की तरफ से मजबूत विरोध दर्ज किया। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री केसीआर तेलंगाना राज्य में अतिरिक्त कलेक्टरों के लिए 32 लग्जरी गाड़ियां खरीदने के लिए किए गए 11 करोड़ रुपये से अधिक खर्च को कैसे उचित ठहरा सकते हैं?”
भाजपा नेता ने दावा किया कि राज्य के मुख्यमंत्री महामारी के बीच सार्वजनिक धन की भारी बर्बादी कर रहे हैं। उन्होंने तेलंगाना सरकार के लग्जरी गाड़ी खरीदने के फैसले को भायानक और अकल्पनीय बताया।
कृष्णा सागर राव ने आगे कहा, “वित्त मंत्री हरीश राव ने हाल ही में बयान दिया था कि राज्य को कोविड-19 लॉकडाउन के कारण बड़े पैमाने पर राजस्व का नुकसान हुआ है और वह अधिक ऋण जुटाने के लिए राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) की सीमा बढ़ाना चाहते हैं।” भाजपा ने मौजूदा आर्थिक स्थिति में वित्त मंत्री के न्यूनतम राजकोषीय अनुशासन पर सवाल उठाया।
कृष्णा सागर ने सुझाव दिया कि लग्जरी कार खरीदने में लगाए गए पैसे का इस्तेमाल बेड के विस्तार या गरीबों को मुफ्त इलाज देने के लिए किया जा सकता था। उन्होंने फैसले को तत्काल वापस लेने की मांग की और सरकार से वाहनों की खरीद पर रोक लगाने को कहा।
इस कदम की तेलंगाना कांग्रेस ने भी आलोचना की थी। AICC के प्रवक्ता श्रवण दासोजू ने तेलंगाना सरकार के इस कदम को “गैर-जिम्मेदाराना” खर्च बताया है। कांग्रेस नेता ने दावा किया, “केसीआर के नेतृत्व वाली टीआरएस सरकार जनता के पैसे को संभालने में पूरी तरह से गैर जिम्मेदार है। ऐसे में केसीआर ने तेलंगाना के अधिशेष राज्य को लगभग 4 लाख करोड़ रुपये के कर्ज के जाल में धकेल दिया है।”