छत्तीसगढ

बूढ़ा तालाब गहरीकरण के लिए 15 दिसंबर को जुटेगी ग्रीन आर्मी की टीम

  • ग्रीन आर्मी के संस्थापक अमिताभ दुबे ने प्रेसवार्ता में दी जानकारी
  • पूर्व विधायक महंत रामसुंदर दास ने तालाबों की दुर्दशा पर जताई चिंता
  • एक व्यक्ति एक धमेला कार्यक्रम के तहत कचरा निकालने लोगों से किया जाएगा आह्वान

रायपुर। पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य कर रही संस्था ग्रीन आर्मी ऑफ रायपुर 15 दिसंबर से बूढ़ा तालाब का गहरीकण शुरू करेगी। मारवाड़ी शमशान घाट के सामने नेहरु नगर मार्ग से लगे तालाब में पटे मलबे को नगर निगम और जनसहयोग से निकालेगी। सुबह 7 बजे कार्य प्रारंभ होगा। इस अवसर पर मैं बूढ़ा तालाब हूं विषय पर संगोष्ठी भी आयोजित की जाएगी। यह जानकारी ग्रीन आर्मी ऑफ रायपुर के संस्थापक अमिताभ दुबे ने दी। उन्होंने बताया कि ग्रीन आर्मी ने पिछले माह 9 नवंबर को बूढ़ा तालाब संरक्षण के लिए मानव श्रंखला बनाकर अभियान की शुरुआत की थी। इसके बाद से ग्रीन आर्मी की टीम प्रत्येक रविवार को तालाब सफाई कार्य कर रही है। श्री दुबे ने कहा कि 20 साल से इस तालाब को साफ करने की ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। आज यह तालाब गदंगी से पटने लगने लगा है। तालाब की सुरक्षा हम सभी शहरवासियों की जिम्मेदारी है। ग्रीन आर्मी तालाब गहरीकरण के लिए एक व्यक्ति एक धमेला कार्यक्रम के तहत तालाब के आसपास रह रहे लोगों से आह्वान करेगी कि प्रत्येक व्यक्ति कम से कम एक धमेला कचरा या मलबा निकालकर पट रहे बूढ़ा तालाब को साफ करने में अपना योगदान दें। उन्होंने बताया कि जब तक बूढ़ा तालाब की सफाई नहीं हो जाती, ग्रीन आर्मी की टीम वहां सफाई जारी रखेगी। इस तालाब का एक बड़ा हिस्सा पूजन सामग्री, जलकुंभी व कचरों से पट चुका है। तालाब का अस्तित्व खतरें में हैं। उन्होंने शहरवासियों से आह्वान किया कि तालाब को बचाने सबको आगे आने की जरुरत है। तालाब बचेगा तो भूमिगत जल संरक्षित होगा। तालाब बचेगा तभी हमारी संस्कृति, रिती-रिवाज जिंदा रह पाएंगे। बूढ़ा तालाब हमारे शहर का ऐतिहासिक तालाब है। इस तालाब को पुनर्जीवन देने का जिम्मा ग्रीन आर्मी ने उठाया है। मोर रायपुर मोर जिम्मेदारी के तहत हमने 125 तालाबों का चिन्हांकन किया है, एक-एक कर हम सभी तालाबों को बचाने की मुहिम को तेज करेंगे। हम अपनी पूरी ताकत से तालाबों को बचाने के प्रयास में जूट गए हैं। इस अवसर पर पूर्व विधायक महंत रामसुंदर दास ने कहा कि शहर, मठ, मंदिर का विकास तालाब या नदी के किनारे ही विकसित होता है। कोई भी सभ्यता यही पुष्पित और पल्लवित होती है। आज समय के साथ हमें आचार और विचार को भी बदलने की आवश्यकता है। तालाबों में पूजन सामग्री को विसर्जित करने की मान्यता को खत्म कर अब नई व्यवस्था को बनाने की जरुरत आ गई है। तालाब में पूजन सामग्री को प्रवाहित करने की बजाय अब एक विसर्जन कुंड बनाने की आवश्यकता है ताकि तालाबों को मरने से बचाया जा सके। एक समय जब रायपुर में बड़े और गहरे तालाब हुआ करते थे। आज इनकी संख्या में काफी कमी आई है। प्रेस वार्ता में ग्रीन आर्मी के ब्लू विंग के चेयरमेन मोहन वाल्यानी, राकेश बरडिय़ा, बूढ़ा तालाब संरक्षण समिति के अध्यक्ष राजू यदु, लक्ष्य चौरे, हिमांशु तिवारी, शशिकांत यदु, अनिल वर्मा,अजीत जलक्षत्रीय समेत ग्रीन आर्मी के सदस्य भी मौजूद थे।

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