छत्तीसगढ

अतिवृष्टि के बाद धान में पैदा हुए रोगों से बचाव के लिए किसानों को भ्रमण दल ने दिए सुझाव

बिलासपुर, 5 सितम्बर। भारी वर्षा के कारण खरीफ फसल को हुए नुकसान को देखते हुए कृषि अधिकारियों व वैज्ञानिकों ने जिले में भ्रमण किया और धान फसल को कीट व रोगों से बचाने के लिये उपयुक्त मार्गदर्शन प्रदान किया।
जिले में विगत दिनों में हुई भारी वर्षा के कारण लगभग सभी विकासखण्ड में जल भराव की स्थिति निर्मित हुई थी तथा खरीफ धान फसल के समय होने के कारण कुछ स्थानों पर खेतों में जलभराव वाली स्थिति बनी थी। अत्यधिक जल भराव एवं बाढ़ जैसी स्थिति के साथ खेतों में लगी धान फसल डूब गई थी। इससे धान में ब्लाईट एवं झुलसा जैसे रोगों के आने की शिकायत मैदानी अमलों एवं किसानों से लगातार प्राप्त हो रही थी। इसे देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों व अधिकारियों ने जिले में संयुक्त भ्रमण किया। बिल्हा विकासखंड के अत्यधिक प्रभावित क्षेत्रों जैसे-ग्राम सिलपहरी, पिरैया एवं बुंदेला क्षेत्र के किसानों के खेतों में लगे धान फसल का निरीक्षण किया गया साथ ही जिले के अन्य विकासखंड में दौरा कर वस्तु स्थिति का आकलन किया गया।
अधिकारियों ने किसानों को बताया कि धान के खेतों में अत्यधिक जल भराव होने के कारण शीथ ब्लाईट जो कि एक फफूंदजनक बीमारी है एवं इसके स्पोर पानी के माध्यम से फैलते हैं। धान में झुलसा रोग तथा प्रमुख रूप से बैक्टीरियल लीफ ब्लाईट की समस्या भी देखी गई है। शीथ ब्लाईट रोग में धान के पौधे के तना नीचेवाले हिस्से में जहां आमतौर पर कंशा निकलता है एवं धान के खेत में धान के पौधे के बराबर जहां तक पानी का भराव होता है। उस स्थान पर पौधे के ऊपर काले धब्बे पड़ जाते हैं, ऊपर की पत्तियां पीली पड़ जाती है तथा पौधों की वृद्धि रुक जाती है। इसके अलावा धान के झुलसा रोग में नाव के जैसे दिखने वाले धब्बे पत्तियों के ऊपर में दिखाई देते हैं। बैक्टीरियल ब्लाईट में धान के पौधों की पत्तियां ऊपरी टिप के हिस्से से सूखने लगती है।
किसानों को सलाह दी गई कि धान के शीथ ब्लाईट के रोकथाम हेतु सर्वप्रथम खेत के अतिरिक्त जल को कम करें एवं फफूंदीनाशक हेक्साकोनाजोल दवा 200 मि.ली. प्रति एकड़ के दर से एवं झुलसा रोग के लिए ट्राईसाइक्लोजोल दवा 01 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। बैक्टीरियल लीफ ब्लाईट रोग के लिए खेत से निकासी के साथ स्ट्रेप्टोसाइक्लिन नामक दवा का छिड़काव किया जा सकता है। उक्त रोगों के रोकथाम में धान के खेतों में खड़ी फसल पर पोटाश को 10 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से प्रयोग करें। पोटाश के उपयोग से चमकदार एवं अच्छे वजनदार दाने बनते हैं तथा उत्पादन में वृद्धि होती है। रासायनिक दवाओं का उपयोग सुबह 9 से 10 बजे के बीच में किया जाये तथा बारिश की संभावना नहीं होने पर ही छिड़काव करें।

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