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नेताजी सुभाष चंद्र बोस के वंशज ने दिए सक्रिय राजनीति में लौटने के संकेत, कहा- राजद्रोह जैसे कानूनों को निरस्त करने की जरुरत

कोलकाता, 21 अगस्त। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के वंशज सुगत बोस ने कहा कि औपनिवेशिक काल के राजद्रोह जैसे कानून, जिनका इस्तेमाल अभी भी असंतोष को दबाने के लिए किया जा रहा है, को निरस्त किया जाना चाहिए। 2014 में कोलकाता की जादवपुर सीट से तृणमूल के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीतने वाले बोस ने पिछला संसदीय चुनाव लड़ने से मना कर दिया था। सुगत अब कह रहे हैं कि वे लोकतंत्र के समर्थन में गुणात्मक परिवर्तन लाने में भूमिका निभाना चाहेंगे।

उनकी इस टिप्पणी को संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि वे जल्द ही सक्रिय राजनीति में लौट सकते हैं। उन्होंने आगे कहा-‘ औपनिवेशिक युग के कई कानून, जो नेताजी, महात्मा गांधी और बाल गंगाधर तिलक जैसे स्वतंत्रता सेनानियों को चुप कराने के लिए इस्तेमाल किए गए थे, अभी भी सरकार द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे हैं। हमें अपने लोकतंत्र के स्तंभों को मजबूत करना है, इसलिए औपनिवेशिक युग के कानूनों को निरस्त करने की जरूरत है। मैं इस तथ्य से विशेष रूप से चिंतित हूं कि कुछ मामलों में बंदी प्रत्यक्षीकरण के रिट को भी निलंबित किया जा सकता है।’

सुगत, जो नेताजी रिसर्च ब्यूरो के अध्यक्ष हैं, हार्वर्ड विश्वविद्यालय में इतिहास के गार्डिनर प्रोफेसर हैं,, ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी हाल में देशद्रोह कानून की जरुरत पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा-‘हमने इन औपनिवेशिक कानूनों को जारी रखा है। कभी-कभी यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम) जैसे नए नामों के रूप में। लोकतंत्र के क्षरण को बचाने के लिए इन्हें खत्म करने की जरूरत है औपचारिक आपातकाल के बिना भी इन कानूनों का लागू होना आपातकाल की स्थिति पैदा करने के लिए पर्याप्त है। इनके तक्षत नेताजी पर कई बार देशद्रोह का आरोप लगाया गया था।’

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