पंजाब कांग्रेस के घमासान में अब फिक्सिंग का आरोप, कमेटी की बैठक से पहले MLAs को फोन पर विवाद

चंडीगढ, 1 जून। पंजाब कांग्रेस की अंतरकलह में नया माेड़ और विवाद सामने आ गया है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के खेमे ने पूरे मामले में ‘फिक्सिंग’ का आराेप लगाया है। पार्टी में मचे घमासान को सुलझने के लिए कांग्रेस हाईकमान द्वारा गठित की गई तीन सदस्यीय कमेटी की बैठक से पहले ‘फिक्सिंग’ करने की कोशिश का खुलासा हुआ। आरोप है कि पंजाब कांग्रेस के एक पूर्व सह प्रभारी की तरफ से विधायकों को फोन कर कहा गया कि कमेटी के सामने उन्हें क्या कहना है। कमेटी के समक्ष सोमवार को आठ मंत्री व 17 कांग्रेस विधायक पेश हुए।
सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के पास पहुंची रिकार्डिंग, पार्टी हाईकमान को फोन कर जताई आपत्ति
यह जानकारी मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के पास पहुंच गई। इसके बाद मुख्यमंत्री ने पार्टी हाईकमान को फोन कर इस पर आपत्ति दर्ज करवाई। प्राइज़ जानकारी के अनुसार कुछ विधायकों ने मुख्यमंत्री को इसकी रिकार्डिंग भी मुहैया करवाई। इस प्रकरण के बाद पार्टी में नया विवाद छि़ड़ने की संभावना है।
के्ंद्रीय कमेटी की बैठक में नेताओं ने कहा- कैप्टन बनाम सिद्धू लड़ाई में पार्टी बनी हाईकमान
बैठक के दौरान भी यह मुद्दा उठा कि पंजाब में कैप्टन बनाम सिद्धू की लड़ाई में पार्टी हाईकमान एक ‘पार्टी’ बन गई है। राज्य के एक वरिष्ठ मंत्री ने यह बात मल्लिकार्जुन खड़गे, जय प्रकाश अग्रवाल और हरीश रावत की कमेटी के सामने भी यह बात कही कि इस विवाद में पार्टी को नुकसान पहुंच रहा है। वहीं, बैठक से पहले विधायकों को कांग्रेस के सचिव व राजस्थान के मंत्री हरीश चौधरी द्वारा फोन करके बैठक में क्या कहना है, यह समझाने की कोशिश की गई। यह मामला तब गर्मा गया जब यह मामला मुख्यमंत्री के पास पहुंच गया।
पार्टी के उच्चस्तरीय सूत्र बताते हैं कि किसी विधायक ने हरीश चौधरी के फोन को टेप कर लिया। इसकी रिकार्डिंग भी मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के पास पहुंच गई। सूत्र बताते हैं कि कैप्टन ने इस संबंध में राहुल गांधी से भी बातचीत की। हालांकि हरीश चौधरी ने इस बात से साफ इन्कार किया है कि उन्होंने किसी को फोन किया। उनका कहना है ‘मैं राजस्थान में अपने विधान सभा क्षेत्र में हूं । पंजाब के विधायकों के साथ मैं लंबे समय से संपर्क में नहीं हूं।’
कमेटी की सुनवाई में दो धड़ों में बंटी दिखी पंजाब कांग्रेस
वहीं, कमेटी के सामने कांग्रेस पार्टी साफ तौर पर दो भागों में बंटी हुई नजर आई। सुबह सबसे पहले कमेटी के सामने कांग्रेस के प्रदेश प्रधान सुनील जाखड़ पेश हुए। वह तकरीबन 40 मिनट तक कमेटी के सामने रहे। इस दौरान उन्होंने पार्टी के खिलाफ चलने वाले और पार्टी को नुकसान पहुंचाने वालाें के नाम खुल कर लिए। जाखड़ ने बतौर प्रधान सरकार में चल रही खामियों का भी कमेटी के सामने जिक्र किया।
नवजोत सिंह सिद्धू काे तव्वजो पर उठे सवाल
सूत्र बताते हैं कि कमेटी यह जानने की कोशिश में जुटी रही कि विवाद के असली कारण क्या है और उसे कैसे हल किया जा सकता है। वहीं, कमेटी के सामने एक विधायक ने तो यहां तक कह दिया कि इन दिनों पार्टी में नवजोत सिंह सिद्धू को खासी तवज्जों दी जा रही है लेकिन इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि सिद्धू ने डा. मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी और राहुल गांधी को क्या नाम दिया था। एक मंत्री ने यहां तक कहा कि इस विवाद में पार्टी हाईकमान खुद एक पार्टी की भूमिका अदा कर रही है।
एक वर्ग ने कैप्टन अमरिंदर सिंह की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। एक विधायक ने कहा कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार में अपनी मनमानी कर रहे है और वह सभी के लिए कभी भी उपलब्ध नहीं है। सिद्धू जो मुद्दे उठा रहे है वे ठीक हैं। 2022 में अगर कांग्रेस को जीतना है तो बेअदबी और ड्रग्स जैसे मुद्दे पर गंभीरता दिखानी पड़ेगी। सोमवार को कमेटी के सामने 8 मंत्री और तकरीबन 17 विधायक पेश हुए। मनप्रीत बादल को कमेटी ने 11 बजे बुलाया था लेकिन उन्हें तकरीबन चार घंटे इंतजार करना पड़ा। यह बैठक अगले दो दिनों तक जारी रहेगी।