छत्तीसगढ

महिला आयोग में महिलाओं को न्याय दिलाने में नही छोड़ेगी कोई कसर: डॉ किरणमयी नायक

दंतेवाड़ा, 7 नवम्बर। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक और आयोग के गठित समिति द्वारा शुक्रवार को दंतेवाड़ा जिले में महिलाओं की उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों की सुनवाई कलेक्टोरेट कार्यालय के सभाकक्ष में की गई।

किरन्दुल में शादी शुदा पत्नी और दो बच्चों को छोड़कर बिहार भागे पति और उनकी दूसरी शादीसुदा पत्नी और उनके मा के खिलाफ जुर्म पंजीबद्ध करने का निर्देश दिया बिना तलाक दिए दूसरी शादी करना अपराध है लगभग 6 वर्ष पुराने प्रकरण में बिहार के डीजीपी के नाम मे पत्र लिखने का नाम पर अनावश्यक देर होता रहा और आवेदक को न्याय नही मिल सका इस पर थाना कोतवाली के टी आई के मार्क कर एस पी को सूचित करने का निर्देश दिया गया कि तत्काल धारा 494 और 498 a के तहत एफ आई आर दर्ज कर बिहार से अभियुक्तों को गिरफ्तार कर चालान न्यायालय में प्रस्तुत करे और 3 माह में आयोग को सूचित करें इस मामले में आवेदिका के मामले में की जा रही कार्यवाही को निगरानी करने के लिए नगर पालिका अध्यक्ष राजेन्द्र मिर्णाल को निर्देशित किया गया।

एक अन्य प्रकरण में पुलिस आरक्षक के द्वारा 5 वर्ष तक आवेदिका का दहेज शोषण मामले में एफ आई आर दर्ज होने के बावजूद पुलिस आरक्षक अनावेदक के द्वारा आवेदिका को प्रताड़ित करने के लिए थाना प्रभारी के माध्यम से तंग करने के मामले में एस पी की रिपोर्ट के आधार पर थाना प्रभारी के खिलाफ विभागीय जांच के निर्देश के पालन प्रतिवेदन की जानकारी मंगाई गई और आरक्षक के खिलाफ विभागीय जांच कर ऐसे पुलिस आरक्षक को शासकीय सेवा से बर्खास्त किया जाए क्योंकि जब रक्षक ही भक्षक हो जाये तो चूंकि यह आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है ऐसी परिस्थिति में महिलाओं को शोषण से बचाने की जिम्मेदारी किसको दी जाए ऐसे मामलों को निराकरण किया जाना आवश्यक है
इस मामले में आवेदिका ने यह कहा था कि आरक्षक जमानत पर रिहा होने के बावजूद अश्लील छीटा कसी करता है जिस पर अनावेदक को कड़ी फटकार लगाते हुए आवेदिका को नैतिक सम्बल दिया और समझाइश दिया कि छत्तीसगढ़ की प्रत्येक महिला निडरता से रहे और ऐसे लोगो का प्रतिकार करे।

एक अन्य प्रकरण में कार्यस्थल पर लैंगिक शोषण के मामले में स्थानीय समिति की द्वारा की गई जांच को अपर्याप्त मानते हुए दन्तेवाड़ा के दो डिप्टी कलेक्टर सुश्री आस्था राजपूत एवं प्रीति दुर्गम और जिला पंचायत अध्यक्ष सुश्री तूलिका कर्मा की अनिवार्य उपस्थिति के साथ आंतरिक परिवाद समिति का गठन कर तीन माह में आवेदिका के प्रकरण की पुनः जांच करने का निर्देश दिया।

एक वृद्ध मा ने मारपीट करने वाले अपने पुत्र के खिलाफ आयोग को शिकायत की जिसे तत्काल संज्ञान में लेते हुए टी आई को निर्देशित किया कि आवेदिका के पुत्र के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करते हुए उसे तत्काल अभिरक्षा में लिया जावे और नशा कर मारपीट करने पर उसे नशामुक्ति केंद्र में उपचार करवाकर परिवार से सुधरने पर ही मिलने का निर्देश दिया।
सभागर में उपस्थित महिला जनप्रतिनिधियों को विशेष रूप से जानकारी दिया कि कार्य स्थल पर लैंगिक शोषण के मामले में कार्य स्थल पर तत्कार आंतरिक परिवाद समिति का गठन कर कार्यालय के पटल पर लगाई जाए।

सुनवाई के दौरान शासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार सोशल डिस्टेंसिंग और फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन किया गया। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी विजेन्द्र ठाकुर विधायक श्रीमती देवती कर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष तूलिका कर्मा, शासकीय अधिवक्ता कु शमीम रहमान, महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी कर्मचारी एवं पुलिस प्रशासन भी मौजूद थी।

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