मदिरा प्रेमियों के लिए खुशखबरी! कल से खोली जायेगी शराब दुकानें व बंद दफ्तरों के ताले

रायपुर। कल यानी 4 अप्रैल से प्रदेश में शराब की दुकानें खुल जाएगी। छत्तीगढ़ के सभी जोनों में ये दुकानें खुलेगी। अर्थात राजधानी रायपुर जो कि मौजूदा समय में रेड जोन में है, यहां भी शराब की दुकान खोली जायेगी। राज्य सरकार की तरफ से इस बाबत सभी कलेक्टर को आदेश जारी कर दिया गया है। सुबह 8 बजे से शाम के 7 बजे तक शराब की दुकानें खोली जायेगी। हालांकि केंद्रीय गृहमंत्रालय की गाइडलाइन का यहां पालन करना अनिवार्य होगा।
प्रदेश सराकर ने फुटकर शराब दुकानों से देशी विदेशी शराब खरीदने की सीमा प्रति व्यक्ति 2 बोतल तथा बीयर खरीदने की सीमा 4 बोतल थी। लाकडाउन के दौरान दुकान में होने वाली भीड़ में कमी लाने के उद्देशय से देशी-विदेशी शराब बिक्री की सीमा 3000 एमएल तथा बीयर की विक्रमय सीमा को 6 क्वार्टर बोतल किया गया है। हालांकि ग्राहक के विक्रय काउंटर से खरीदने वाली शराब 5000 एमएल से अधिक नहीं होगी। सोशल डिस्टेंसिंग के उद्देशय से डिलीवरी ब्वाय के माध्यम से शराब दी जायेगी। इस बाबत डिलीवरी ब्वाय की नियुक्ति की जायेगी।
सरकारी दफतर भी खुलेंगे
40 दिनों से बंद दफ्तरों के ताले भी सोमवार से खुल जायेंगे। इस बाबत राज्य सरकार ने आदेश जारी कर दिया है। जीएडी सचिव कमलप्रीत सिंह की तरफ से जारी आदेश के मताबिक कोरोना के मद्देनजर शासकीय कार्यालयों का काम नहीं हो रहा था, लेकिन लोकहित को ध्यान में रखते हुए और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए कार्यालयों का संचालन किया जायेगा।
कल यानि 4 मई से प्रदेश के सभी शासकीय कार्यालय एवं विभागों के अंतर्गत निगम, मंडल, आयोग और अन्य प्रशासनिक इकाईयों खुलनी शुरू हो जायेगी। कार्यालय में राजपत्रित अधिकारियों की शत प्रतिशत उपस्थिति होगी, जबकि अन्य अधिकारी कर्मचारियों की उपस्थिति एक तिहाई होगी। कार्यालयों में इसे लेकर ड्यूटी रोस्टर बनाया जायेगा। हालांकि कन्टेमेंट जोन में किसी तरह के कार्यालयों का संचालन नहीं किया जायेगा।
शासकीय कार्यालयों में काम शुरू करने से पहले सेनेटाइजेशन और साफ सफाई की व्यवस्था जारी निर्देश के अनुसार करना होगा। इस बात का निर्देश दिया गया है कि कार्यालयों में बैठक कम से कम किया जाये। बैठक के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी करना जरूरी होगा। कार्यालय परिसर के बाहर शिकायत पेटी रखी जायेगी, जिसमें लोग अपनी शिकायत को रख सकेंगे, जिसका निराकरण अधिकारियों के द्वारा प्राथमिकता के आधार पर किया जायेगा। अधिकारी व कर्मचारियों को इस बात की सख्त हिदायत दी गयी है कि वो सामूहिक कार्यक्रम का आयोजन कार्यालयों में ना होने दें।