विपक्ष का आरोप: छत्तीसगढ़ सरकार धान खरीदी से जुड़ी सोसायटी को खत्म करने की साजिश कर रही, लाखों किसानों को होगा नुकसान

रायपुर, 19 मार्च। जब धान खरीदी से जुड़ी सोसायटी बंद हो जाएगी या नुकसान में होगी तो किसानों पर इसका सबसे अधिक प्रभाव पड़ेगा। नियमों को ताक पर रखकर सोसायटी के अस्तित्व को खत्म किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार सहकारिता का सरकारी करण करने पर तुली हुई है। ये बातें भारतीय जनता पार्टी सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक शशिकांत द्विवेदी ने कहीं। रायपुर के भाजपा दफ्तर में उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस ली। उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों से धान उपार्जन केंद्रों में धान पड़ा हुआ है, इसका न तो उठाव हो रहा है न ही सोसायटी जो ये केंद्र चलाती हैं, उन्हें भुगतान किया जा रहा है।
नियम के खिलाफ काम कर रही सरकार
शशिकांत ने आगे कहा कि सरकार ने नियमों को ताक पर रखकर गलत तरीके से 1333 सोसायटी भंग कर दी थी। 500 सोसायटी का फिर से गठन हुआ, इन्हें भी भंग करने की कोशिश की गई। किसानों से किया गया कोई भी वादा नहीं निभाया जा रहा। इससे भरोसे का संकट पैदा हो गया है। सरकार ने कहा था कि 2500 रुपए के मूल्य पर किसानों से धान लेंगे मगर भुगतान नहीं हुआ है। 60 साल के किसानों को पेंशन देने की बात थी, उस पर भी किसी का ध्यान नहीं है।
रखी ये मांगे
शशिकांत ने कहा कि मैं ये मांग करता हूं कि जिन किसानों से बारदाने की कमी की वजह से अपने स्तर पर बारदाना खरीद कर धान दिया। उन्हें बारदाने की कीमत दी जाए। सभी किसानों को बोनस की राशी दी जाए, 22 लाख किसानों ने धान बेचा, करीब 1 लाख पंजीकृत किसान धान बेचने से वंचित रह गए, उनके बारे में भी सरकार सोचे। खरीदी केंद्रों में टोकन के नाम पर दलाली हुई। पिछले 4 महीने से पड़े धान को ले जाकर मार्कफेड के सेंटर्स में रखा जाए। सोसायटी में भुगतान न होने से धान खरीदी का काम करने वाले कर्मचारियों को वेतन देने का संकट आन पड़ा है, इस ओर भी सरकार सोचे।