छत्तीसगढ

शर्तों पर शांति वार्ता: नक्सलियों ने कहा- सशस्त्र बल हटाओ, संगठन पर प्रतिबंध हटे, नेताओं की बिना शर्त रिहाई हो; गृहमंत्री बोले-पत्र मिलने के बाद CM करेंगे फैसला

बीजापुर, 18 मार्च। छत्तीसगढ़ प्रदेश के गठन के बाद नक्सलियों ने शांति वार्ता का प्रस्ताव रखा है। वह छत्तीसगढ़ सरकार से बातचीत के लिए तैयार हैं। हालांकि शर्तों के कंबल में लिपटे ही शांति प्रस्ताव में भी शर्ते ही हैं। नक्सलियों ने कहा है कि जनता की भलाई के लिए वह वार्ता को तैयार हैं लेकिन सशस्त्र बल हटाया जाए, माओवादी संगठनों पर लगे प्रतिबंध भी हटें और जेल में बंद उनके नेताओं की बिना किसी शर्त के रिहाई हो।

नक्सली प्रवक्ता विकल्प की ओर से जारी की गई विज्ञप्ति में बस्तर में शांति स्थापित करने के लिए गठित सिविल सोसायटी पर सवाल उठाए गए हैं। नक्सलियों की ओर से कहा गया है कि ये सरकारी सोसायटी है। कॉरपोट और सरकारी दमन का यह मानवीय मुखौटा है। नक्सलियों ने कहा है कि सिविल सोसायटी में शामिल राजनेता, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता सरकारी साजिश का शिकार ना बने। शांति के लिए पदयात्रा सहित और भी तरीके अपनाएं।

नक्सलियों ने अशांति के लिए 30 से ज्यादा मुद्दे बताए
नक्सलियों ने बस्तर, छत्तीसगढ़ और देश में अशांति के लिए 30 से ज्यादा मुद्दे बताए हैं। इसको लेकर केंद्र और राज्य की सरकारों पर भी निशाना साधा है। कहा कि देश की तमाम वर्ग उत्पीड़न और दमन का शिकार हैं। कारपोरेट घरानों के साथ मिलकर जल, जंगल और जमीन का हनन कर रहे हैं। इनके हल के बिना शांति संभव नहीं है। शांति की कवायद अशांति की जड़ों को समाप्त करने की दिशा में होनी चाहिए।

पुराने अनुभवों से सिविल सोसायटी को सबक लेना चाहिए

नक्सलियों ने विज्ञप्ति में लिखा है कि शिक्षा, पेयजल, स्वास्थ्य, कृषि इन सब समस्याओं पर सरकार को आगे आना चाहिए। हमारी पार्टी और सरकार के बीच वार्ता के लिए अनुभवों से सिविल सोसायटी को सबक लेना चाहिए। सभी वाकिफ हैं कि कनसर्ड सिटीजंस कमेटी के प्रयासों से 2004 में आंध्र प्रदेश सरकार के साथ वार्ता शुरू हुई थी लेकिन उसे 2 बार की बातचीत के बाद सरकार ने एकतरफा बंद किया और भीषण दमन का प्रयोग किया था।

गृहमंत्री ने कहा- पत्र मिलने के बाद CM करेंगे फैसला

नक्सलियों की ओर से शांति वार्ता के लिए सरकार के समक्ष रखे गए तीन प्रस्तावों पर गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने सकारात्मक संकेत दिया है। हालांकि उन्होंने मुख्यमंत्री के ऊपर इसे छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि उनके पास तक अभी पत्र नहीं पहुंचा है। पत्र मिलने के पर मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद आगे के कदमों को लेकर फैसला लिया जाएगा।

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