छत्तीसगढ

श्रमिकों को मिला तनाव मुक्ति पर परामर्श, चिंता और नशे से उभारने के लिये दिया गया परामर्श

रायपुर। राजधानी रायपुर के आश्रय स्थलों में ठहरे हुए प्रवासी श्रमिकों को अवसाद, चिंता, बेचैनी और घबराहट से दूर करने के लियें नियमित रूप ज़िला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत परामर्श प्रदान किया जा रहा है ।
अब तक ज़िले के विभिन्न आश्रय स्थलों में रुके छत्तीसगढ के अलावा अन्य राज्यों के लगभग 300 से अधिक प्रवासी श्रमिकों को ज़िला मानसिक स्वास्थ्य द्वारा गठित दल के माध्यम से परामर्श दिया गया है ।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, रायपुर डॉ मीरा बघेल ने बताया जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत परामर्श तीन सदस्य दल का गठन किया गया है जो नियमित रुप से प्रवासी श्रमिकों के लियें बने आश्रय स्थलों पर जा कर सेवाएं प्रदान किया जा रहा है। ज्यादातर श्रमिक लॉक डाउन की चिंता को लेकर डिप्रेशन में है। इसमें सबसे ज्यादा घर जाने की चिंता और नशे की आदत के कारण बेचैनी और घबराहट महसूस कर रहे है जिसको दूर करने के लिए विषय विशेषज्ञों द्वारा उन्हें सलाह दी जा रही है ।
मनोचिकित्सक डॉ.अविनाश शुक्ला ने बताया प्रवासी श्रमिकों से सामान्य बातचीत कर उनकी समस्याओं को समझकर उन्हें उचित परामर्श दिया जा रहा है और साथ ही एक साथी को दूसरे साथी की जिम्मेदारी देकर आपसी समन्वय कर व्यवहारिक दोस्ती बनाने की बात समझाई जाती है।सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखकर आपस में अपने अपने अनुभवों को साझा करने की भी सलाह दी जा रही है ताकि आश्रय स्थलों पर स्वस्थ वातावरण बनाया जा सके । प्रवासी जनों के मानसिक स्वास्थ्य की जांच करते हुए उनमें से कुछ आश्रित जनों में अवसाद चिंता एवं मादक पदार्थों के न मिल पाने के कारण होने वाली परेशानियों की जांच की गई एवं उनको उचित परामर्श देते हुए सपोर्टिव साइकोथेरेपी,स्लीपहाइजीन और रिलैक्सेशन के बारे में बताया गया ।
मनोवैज्ञानिक सुश्री ममता गिरी गोस्वामी ने बताया सर्वप्रथम कोरोना वायरस और कोरोनावायरस के खतरे और बचाव के विषय में बताया जा रहा है। साथ ही श्रमिकों की काउंसलिंग कर उन्हें आश्रय स्थल में साफ सफाई सोशल डिस्टेंसिंग और आपसी व्यवहारिक वातावरण बनाने की सलाह दी जा रही है। मुख्य रूप से लोगों में परिवार से मिलने के प्रति चिंता ज्यादा है जिसको समझाइश देकर और वीडियो कॉलिंग पर बात करवा कर उनके तनाव को कम करने काप्रयास किया जा रहा है ।
सोशल वर्कर तम्बाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ कि सुश्री नेहा सोनी ने बताया ज्यादातर श्रमिक नशे की आदत के कारण बेचैनी से परेशान है। नशे की आपूर्ति न होना से भी उनको अवसाद हो रहा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button