छत्तीसगढ

हुक्के कारोबार पर सख्ती : 2 साल में 19 छापे, 125 हुक्का बार

रायपुर, 23 अक्टूबर। सीएम भूपेश बघेल ने आईजी-एसपी कांफ्रेंस में हुक्के को लेकर कड़े तेवर दिखाते हुए राजधानी समेत पूरे प्रदेश में इसे बंद करने का निर्देश दिया है। दो साल पहले भी हुक्का बार पर सख्त पाबंदी लगाई गई थी, लेकिन हुक्के का कारोबार राजधानी में तेजी से फैला है। बड़े होटलों से लेकर छोटे रेस्तरां तक, ऐसे शहर में 125 से ज्यादा जगह युवाओं को हुक्का उपलब्ध है और टीन-एजर लड़के-लड़कियों तक को परोसा जा रहा है।

हुक्के को लेकर जब-जब शासन स्तर पर पाबंदी होती है, छापे पड़ते हैं। राजधानी में पिछले 2 साल में पुलिस 19 हुक्का बार पर छापे मार चुकी है लेकिन एक-दो दिन सील रहने तथा मामूली जुर्माने के बाद यह फिर खुल जाते हैं। वीआईपी रोड और उसके आसपास का इलाका हुक्के का हब बन गया है। आलम यह है कि vip की इसी सड़क पर और आसपास के क्षेत्रों में करीब 70 से ज्यादा हुक्का सेंटर हैं, जहां सारी रात युवाओं का आना-जाना रहने लगा है। फ्लेवर की आड़ में इन्हीं में से कुछ जगह हुक्का नशीले धुएं का गुबार भी उगल रहा है।

रायपुर पुलिस ने तीन हफ्ते पहले वीकएंड में आधी रात के बाद नशीले हुक्के समेत नशे को रोकने के लिए वीआईपी रोड पर कार्रवाई शुरू की थी, जिसमें दर्जनों युवा पकड़े गए जिनके वाहन जब्त किए गए। लेकिन हुक्का बार बेधड़क चल रहे हैं। सबसे ज्यादा हुक्का बाहर जीई रोड पर तेलीबांधा से वीआईपी रोड और माना के आसपास संचालित हैं। जिन 19 बार पर पुलिस छापे मार चुकी, उनमें से एक भी बंद नहीं हुआ है। हुक्का बार रोकने में नियम-कायदों की कमी बड़ी बाधा बनी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हुक्का बार बंद करने के लिए सख्त कानून की जरूरत है।

हुक्का बार में छापे के बाद पुलिस कोटपा-2003 एक्ट के तहत जुर्माना करती है या मामला कोर्ट में पेश कर देती है। आरोपी थोड़े जुर्माने के बाद छूट जाते हैं। कई बार तो हुक्का बार वालों को थाने से ही छोड़ना पड़ रहा है। इसलिए सख्ती नहीं हो पा रही है।

शाम होते ही छापेमारी, कहीं हुक्का पिलाते नहीं मिले

एसपी आईजी कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हुक्का बार बंद करने के निर्देश दिए और शाम होते ही पुलिस एक्शन में आ गई। देर शाम से पुलिस ने शहर के उन सभी रेस्टारेंट और कैफे में छापेमारी की जहां हुक्का बार चल रहा है। हुक्का बार वाले पहले ही अलर्ट थे। सभी जगह हुक्के का काउंटर बंद था। कहीं भी हुक्का नहीं पिलाया जा रहा था। पुलिस अफसरों ने संचालकों को साफ चेतावनी दे दी कि मुख्यमंत्री का आदेश है। किसी भी सूरत में हुक्का नहीं चलेगा। कहीं हुक्का पिलाते मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अयाशी का अड्डा बना VIP रोड

पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक शहर में सबसे ज्यादा हुक्का बार वीआईपी रोड पर हैं। वहां बड़े-छोटे होटल और कैफे के अलावा कुछ फार्म हाउस और ढाबों में भी हुक्के की सुविधा है। पुलिस के रिकार्ड में ऐसे 52 सेंटर हैं। कुछ लोग क्लब हाउस के आड़ में हुक्का सेंटर चला रहे हैं, जिनमें दूसरे शहरों से लोग आ रहे हैं। तेलीबांधा, सड्‌डू-विधानसभा, माना, मंदिर हसौद, राजेंद्र नगर, टिकरापारा, आमानाका और सिविल लाइन इलाके में भी हुक्का सेंटर चल रहे हैं। इनकी शिकायत होती है, तब पुलिस छापेमारी करती है। लेकिन कमजोर कार्रवाई की वजह से आरोपी छूट रहे हैं और हुक्का बार पर असर नहीं हो रहा है।

कई चिट्ठियां लिखीं, नहीं बन पाया सख्त कानून

पुलिस जब भी हुक्का बार में छापा मारती है, हुक्का पॉट और फ्लेवर मिलता है जो जब्त कर लिया जाता है। इस आधार पर कोटपा-2003 एक्ट में केस दर्ज किया जाता है और सेंटर का लाइसेंस निरस्त करने के लिए प्रशासन को चिट्ठी लिखी जाती है। शहर में अधिकांश हुक्का बार गुमाश्ता लाइसेंस से चल रहे है। फ्लेवर वाले हुक्का नारकोटिक्स एक्ट में नहीं आते, क्योंकि उसमें तंबाखू नहीं होती।

इसलिए कार्रवाई तगड़ी नहीं हो पा रही है। गौरतलब है, दो साल पहले विधानसभा में हुक्का बार का मुद्दा उठने के बाद रायपुर में इसे धारा-144 के दायरे में लिया गया था। लेकिन यह कार्रवाई कुछ दिन में बंद हो गई। उसके बाद रायपुर पुलिस की ओर से कुछ चिट्ठियां शासन और पीएचक्यू को लिखी गईं जिनमें कानून सख्त करने का आग्रह किया गया। लेकिन बात आगे नहीं बढ़ पाई है।

कोटपा एक्ट यानी सार्वजनिक जगह धूम्रपान पर कार्रवाई

सार्वजनिक स्थल जैसे होटल, रेस्तरा, कैफे, शैक्षणिक संस्थान समेत निजी व सरकारी कार्यालयों पर धूम्रपान प्रतिबंधित है। जो धूम्रपान करते पाए जाते हैं, उनपर कोटपा एक्ट-2003 की धारा 4 व 6 के उल्लंघन के तहत मौके पर जुर्माना किया जाता है। हुक्के में यही कार्रवाई होती है। जुर्माना अधिकतम 200 रुपए है।

जिस जगह की सूचना मिलेगी वहां छापा

एसपी रायपुर SP प्रशांत अग्रवाल ने कहा, जहां भी हुक्का पिलाने की सूचना मिलेगी, वहां छापा मारा जाएगा। हुक्का पिलाने वालों पर कोटपा एक्ट के अलावा प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई। ताकि दोषी जेल जा सके।

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