रायपुर, 24 दिसम्बर। Rajyog Meditation : नवा रायपुर के सेक्टर-20 स्थित शांति शिखर में आयोजित ‘संकल्प से सिद्धि’ विषयक कार्यक्रम में शिवानी दीदी ने दिव्य उद्बोधन दिया।

इस अवसर पर जिन्दल स्टील के प्रेसिडेंट प्रदीप टंडन, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा, सीमा सुरक्षा बल के महानिरीक्षक हरीलाल, सेना के ब्रिगेडियर तेजिंदर सिंह बावा, बैंक ऑफ इंडिया की महाप्रबंधक गायत्री काम्पा, छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष विनोद अरोरा, अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक कमल नारायण कांडे, क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी, ब्रह्माकुमारी आशा दीदी, रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।
जीवन प्रबंधन विशेषज्ञा एवं प्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर ब्रह्माकुमारी शिवानी दीदी ने कहा कि हमारे जीवन की गुणवत्ता हमारी सोच पर निर्भर करती है। हम जैसा सोचते हैं, वैसा ही बन जाते हैं। विचारों में अपार शक्ति होती है और श्रेष्ठ विचारों के माध्यम से हर कार्य में सफलता एवं सिद्धि प्राप्त की जा सकती है।
विचारों की शक्ति से असंभव भी संभव
शिवानी दीदी ने कहा कि जब हम अपनी सोच बदलते हैं, तो चमत्कार संभव हो जाता है। असंभव को संभव बनाने का नाम ही संकल्प से सिद्धि है। उन्होंने कहा कि व्यर्थ और नकारात्मक विचारों में अपनी मानसिक शक्ति को नष्ट नहीं करना चाहिए। हम जो चाहते हैं, वही सोचना चाहिए, क्योंकि बार-बार नकारात्मक सोचने से वही हमारे जीवन में साकार हो जाता है।
उन्होंने समझाया कि हमारी सोच हमारे निर्णयों को प्रभावित करती है, निर्णय हमारे कर्म बनते हैं और कर्म से ही हमारा भाग्य निर्मित होता है। सकारात्मक सोच से हम अपने स्वभाव, संस्कार, व्यवसाय, रिश्तों और जीवन की परिस्थितियों को बेहतर बना सकते हैं।
राजयोग मेडिटेशन पर बोलते हुए शिवानी दीदी ने कहा कि यह संस्कार परिवर्तन की एक प्रभावी विधि है, जिससे वर्षों पुराने नकारात्मक संस्कार भी बदले जा सकते हैं। विपरीत परिस्थितियों में भी खुशी को अपना स्वभाव बना लेना ही जीवन जीने की सच्ची कला है। उन्होंने सोने से पहले और सुबह उठते ही सकारात्मक संकल्प करने की सलाह दी, क्योंकि इस समय अवचेतन मन सबसे अधिक सक्रिय रहता है।
राजयोग मेडिटेशन से बदले जा सकते हैं पुराने संस्कार
भोजन और जल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भोजन और पानी को प्रसाद की भावना से ग्रहण करना चाहिए। शरीर का अधिकांश भाग पानी से बना है, इसलिए पानी को सकारात्मक ऊर्जा से चार्ज कर पीना चाहिए। भोजन परमात्मा की स्मृति में और अच्छे विचारों के साथ तैयार किया जाए तो वह प्रसाद बन जाता है।
उन्होंने बाहर के दूषित भोजन के स्थान पर घर का शुद्ध भोजन ग्रहण करने पर जोर दिया और कहा कि अन्न का मन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित जनसमूह ने शिवानी दीदी के विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।


