Desh Raag Event : छत्तीसगढ़ की रचना मिश्रा ने हनोई में जीता दिल…! 3 साल पहले शुरू सीखा था कथक

Desh Raag Event : छत्तीसगढ़ की रचना मिश्रा ने हनोई में जीता दिल…! 3 साल पहले शुरू सीखा था कथक

रायपुर, 17 मई। Desh Raag Event : 51 वर्षीय रचना मिश्रा ने बचपन का सपना पूरा करते हुए वियतनाम के हनोई में कथक की शानदार प्रस्तुति दी। बीमारी के कारण कभी डांस नहीं सीख पाईं, लेकिन 3 साल पहले शुरुआत कर अब अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंच गई हैं।

पहली इंटरनेशनल प्रस्तुति ने जीता दिल

कहते हैं सपनों की कोई उम्र नहीं होती, और इसे सच कर दिखाया है रचना मिश्रा ने। 51 साल की उम्र में उन्होंने वह मुकाम हासिल किया, जिसका सपना बचपन से देखती थीं।

वियतनाम की राजधानी हनोई में 11 मई से 14 मई तक आयोजित ‘देश राग’ इवेंट में रचना मिश्रा ने जयपुर घराने की शास्त्रीय कथक प्रस्तुति देकर दर्शकों का दिल जीत लिया। यह उनकी पहली अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुति थी, जिसे उन्होंने अपनी गुरु श्रीमती आरती शंकर और पंडित राजेंद्र गंगानी को समर्पित किया।

इस भव्य आयोजन का आयोजनडॉ. राखी रॉय द्वारा किया गया था। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल और हैदराबाद सहित विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों ने भारतीय शास्त्रीय कला की शानदार झलक पेश की।

3 साल पहले शुरू सीखा था कथक

रचना मिश्रा की कहानी सिर्फ एक प्रस्तुति नहीं, बल्कि संघर्ष और सपनों की मिसाल भी है। उन्होंने बताया कि बचपन से उनका सपना कथक सीखने का था, लेकिन परिस्थितियों के कारण वे कभी डांस नहीं सीख पाईं। करीब तीन साल पहले उन्होंने कथक की विधिवत शिक्षा शुरू की और आज पूरी निष्ठा के साथ इस कला साधना में जुटी हुई हैं। महज तीन वर्षों में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों तक अपनी पहचान बना ली है।

26 मई को इंडोनेशिया में प्रस्तुति

हनोई में प्रस्तुति देने के बाद अब रचना मिश्रा 26 मई को इंडोनेशिया में होने वाले कार्यक्रम में भी अपनी प्रस्तुति देने जा रही हैं।कार्यक्रम में शास्त्रीय गायन, वादन और नृत्य की प्रस्तुतियों ने भारतीय संस्कृति की गरिमा को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया। डॉ. राखी रॉय भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी और मोहिनीअट्टम की प्रतिष्ठित गुरु हैं और लंबे समय से भारतीय कला एवं संस्कृति के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

रचना मिश्रा ने डॉ. राखी रॉय के प्रति आभार व्यक्त (Desh Raag Event) करते हुए कहा कि ‘देश राग’ जैसे मंच कलाकारों को वैश्विक पहचान दिलाने का काम कर रहे हैं। उनकी यह उपलब्धि उन लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है, जो उम्र या परिस्थितियों के कारण अपने सपनों को अधूरा मान लेते हैं।

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