गड़चिरोली, 17 मई। Naxal Surrender : महाराष्ट्र के गड़चिरोली में 38 लाख के इनामी 5 वरिष्ठ माओवादियों ने पुलिस और CRPF के सामने आत्मसमर्पण किया। इनमें DVCM, PPCM और ACM स्तर के नक्सली शामिल हैं। माओवादियों ने गड़चिरोली पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।

आत्मसमर्पण करने वालों में एक डिविजनल कमेटी सदस्य (DVCM), एक पीपुल्स पार्टी कमेटी सदस्य (PPCM) और एक एरिया कमेटी सदस्य (ACM) शामिल हैं। कई माओवादी पिछले 15 से 25 वर्षों से संगठन में सक्रिय थे।
पुलिस के अनुसार, वर्ष 2025 से अब तक 137 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं। वहीं, 2005 से लागू आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत अब तक कुल 819 माओवादी मुख्यधारा में लौट चुके हैं।
इन माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण
- मधु उर्फ राकेश उर्फ बाजीराव बुकलु वेलदा (DVCM), 16 लाख इनाम
- जीवन उर्फ जग्गु उर्फ भीमा देवा मड़काम (PPCM), 8 लाख इनाम
- रजनी उर्फ दुर्गा उर्फ रामोती धुर्वा (ACM), 6 लाख इनाम
- मंगली रघु कुरसम, 4 लाख इनाम
- लक्ष्मी डेंगा पुनेम, 4 लाख इनाम
गड़चिरोली में कमजोर पड़ रहा माओवादी नेटवर्क
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गड़चिरोली जिले में माओवादी गतिविधियां अब लगभग समाप्ति की ओर हैं। पहले जहां जिले के 10 उपविभागों में माओवादी संगठन सक्रिय था, अब यह केवल भामरागढ़ उपविभाग के सीमावर्ती इलाकों तक सीमित रह गया है।
पुनर्वास नीति के तहत मिलेगी आर्थिक सहायता
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को केंद्र और राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता दी जाएगी। वरिष्ठ माओवादियों को 5 लाख से 8.5 लाख रुपये तक की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। इसके अलावा पति-पत्नी के रूप में आत्मसमर्पण करने वालों को अतिरिक्त 1.5 लाख रुपये और समूह में सरेंडर करने पर 4 लाख रुपये तक अतिरिक्त सहायता का प्रावधान है।
पहले भी हुआ था बड़ा सरेंडर
गौरतलब है कि अक्टूबर 2025 में CPI (माओवादी) के केंद्रीय समिति सदस्य और प्रवक्ता मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति उर्फ सोनू सहित 61 माओवादियों ने 54 हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद से दंडकारण्य क्षेत्र में माओवादी संगठन को लगातार झटके लग रहे हैं।
अधिकारी रहे मौजूद
आत्मसमर्पण कार्यक्रम में CRPF और पुलिस विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी (Naxal Surrender) मौजूद रहे। अधिकारियों ने कहा कि लगातार चल रहे अभियानों और पुनर्वास नीति के कारण माओवादी हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं।

