Rationalization Campaign : मुख्यमंत्री की पहल बनी संजीवनी…! भयानक…वीभत्स…अद्भुत…शांत और वात्सल्य रस से रूबरू हो रहे है विद्यार्थी…दूरस्थ लैंगी स्कूल को मिला वर्षों बाद तोहफा

Rationalization Campaign : मुख्यमंत्री की पहल बनी संजीवनी…! भयानक…वीभत्स…अद्भुत…शांत और वात्सल्य रस से रूबरू हो रहे है विद्यार्थी…दूरस्थ लैंगी स्कूल को मिला वर्षों बाद तोहफा

कोरबा/लैंगी, 14 सितंबर। Rationalization Campaign : राज्य शासन द्वारा चलाए जा रहे शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण अभियान ने छत्तीसगढ़ के दूरस्थ अंचलों के विद्यालयों की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। इस बदलाव का ताजा उदाहरण है कोरबा जिले का अति-पिछड़ा ग्राम लैंगी, जहां वर्षों से शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हाई स्कूल को पहली बार हिन्दी और अंग्रेजी विषय के व्याख्याता मिले हैं।

2011 में स्थापित इस हाई स्कूल में अब तक इन दोनों महत्वपूर्ण विषयों के लिए कोई शिक्षक उपलब्ध नहीं था। इससे न केवल स्थानीय छात्रों, बल्कि आस-पास के दर्जनों गांवों. अमझर, पोड़ीकला, दुल्लापुर, तराईनार, पिपरिया, इमलीबरहा और कोड़गार के विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी।

मुख्यमंत्री की पहल बनी संजीवनी

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा किए गए युक्तियुक्तकरण के तहत, अब विद्यालय को हिन्दी विषय के व्याख्याता दिनेश कुमार यादव और अंग्रेजी विषय के व्याख्याता श्री विनोद कुमार साहू उपलब्ध कराए गए हैं। दोनों शिक्षक अब नियमित रूप से कक्षाएं ले रहे हैं, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की राह प्रशस्त हुई है।

छात्र बोले- अब पढ़ाई में है मजा

विद्यालय के प्राचार्य श्यामलाल अश्विनी बताते हैं कि वर्षों की यह बड़ी समस्या अब खत्म हो गई है। कक्षा 10वीं की छात्राएं समीना, कल्याणी और सोनी मारको कहती हैं, पहले हिन्दी और अंग्रेजी पढ़ने के लिए हम नोट्स से ही समझने की कोशिश करते थे, लेकिन अब हमें विषय विशेषज्ञ शिक्षक मिल गए हैं, जिससे पढ़ाई आसान हो गई है।

कक्षा 9वीं के छात्र दीपक का कहना है कि अब गणित और विज्ञान सहित सभी विषयों के शिक्षक स्कूल में हैं, जिससे पढ़ाई में गति आई है।

शिक्षा से बढ़ा आत्मविश्वास

शिक्षा ने ग्रामीणों में अपने बच्चों के भविष्य को लेकर नई उम्मीद जगाई है। छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ा है। लिहाजा, छात्राओं की उपस्थिति में भी सुधार हुआ है।

स्थानीय ग्रामीणों ने राज्य सरकार का आभार जताते हुए कहा कि शिक्षकों की उपलब्धता से गांव के बच्चे भी अब बराबरी की शिक्षा पा सकेंगे। यह पहल दूरस्थ अंचलों की शिक्षा व्यवस्था के लिए मील का पत्थर साबित होगी।

शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की यह पहल केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि ग्रामीण शिक्षा में सामाजिक परिवर्तन की मजबूत नींव है। इससे न केवल शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि सुदूर अंचलों के विद्यार्थियों को बेहतर भविष्य के लिए सशक्त मंच भी मिलेगा।

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छत्तीसगढ शिक्षा