Raipur Municipal Corporation : बड़ा खुलासा…150+ एकड़ जमीन का फर्जी खेल…! 70 खसरा फाइल गायब…4 अधिकारी निलंबित…नियम तोड़े गए कैसे…?

Raipur Municipal Corporation : बड़ा खुलासा…150+ एकड़ जमीन का फर्जी खेल…! 70 खसरा फाइल गायब…4 अधिकारी निलंबित…नियम तोड़े गए कैसे…?

रायपुर, 20 अप्रैल। Raipur Municipal Corporation : अगर सरकारी फाइलें ही गायब होने लगें और नियमों को दरकिनार कर सीधे फैसले होने लगें, तो सवाल सिर्फ भ्रष्टाचार का नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता का खड़ा होता है। राजधानी रायपुर में नगर निगम से जुड़ा ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां 100 करोड़ से अधिक के कथित जमीन घोटाले ने प्रशासनिक ढांचे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

4 अफसर सस्पेंड

नगर निगम में सामने आए इस बहुचर्चित मामले में बड़ी कार्रवाई (Raipur Municipal Corporation) करते हुए आयुक्त विश्वदीप ने चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। यह कदम एक उच्चस्तरीय जांच रिपोर्ट के आधार पर उठाया गया, जिसमें नियमों की अनदेखी और गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं।

जोन क्रमांक 10 से जुड़े इस प्रकरण में तत्कालीन जोन कमिश्नर विवेकानंद दुबे, कार्यपालन अभियंता आशीष शुक्ला, इंजीनियर योगेश यादव और अजय श्रीवास्तव पर कार्रवाई की गई है। सभी के खिलाफ विभागीय जांच जारी है, साथ ही वेतन वृद्धि पर रोक और आगे कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। करीब 150 से 159 एकड़ अवैध जमीन को नियमों के खिलाफ जाकर वैध बनाने की प्रक्रिया अपनाई गई। सबसे अहम बात यह रही कि इस पूरी प्रक्रिया में नगर निगम मुख्यालय को दरकिनार कर दिया गया और फाइलें सीधे टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNC) विभाग भेज दी गईं।

नियमों के मुताबिक फाइल को जोन से मुख्यालय, फिर कमिश्नर और उसके बाद TNC विभाग तक जाना होता है, लेकिन इस केस में इस पूरी प्रक्रिया को नजरअंदाज किया गया। जब फाइल बाद में कमिश्नर के पास पहुंची, तो उन्होंने खुद इस पर हैरानी जताई।

70 से अधिक खसरा नंबरों से जुड़ी फाइलें गायब

इस मामले को और संदिग्ध बनाता है 70 से अधिक खसरा नंबरों से जुड़ी फाइलों का गायब होना। जांच समिति ने कई बार मूल दस्तावेज मांगे, लेकिन वे उपलब्ध नहीं कराए गए। इससे यह आशंका और मजबूत हो गई है कि मामले को छिपाने की कोशिश की गई।

रिपोर्ट में यह भी संकेत मिला है कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के कुछ अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। बिल्डरों, दलालों और अधिकारियों के बीच संभावित गठजोड़ की बात भी सामने आई है।

यह पूरा मामला बोरियाखुर्द, ओम नगर, साई नगर और बिलाल नगर जैसे इलाकों से जुड़ा है, जहां कथित तौर पर अवैध कॉलोनियों को वैध बनाने के लिए नियमों का उल्लंघन किया गया।

नेता प्रतिपक्ष ने जताई बड़े षड्यंत्र की आशंका

नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी (Raipur Municipal Corporation) ने इसे 100 करोड़ से ज्यादा का घोटाला बताते हुए कहा कि यह एक सुनियोजित षड्यंत्र है, जिसमें दस्तावेज तक गायब कर दिए गए। चार सदस्यीय जांच समिति, जिसकी अध्यक्षता पंकज शर्मा ने की, ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। अब प्रशासन पूरे नेटवर्क की जांच करने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की बात कर रहा है।

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