नई दिल्ली, 06 अगस्त। Shakib House Attack : बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने निर्वासन के बीच बड़ा राजनीतिक संदेश देते हुए कहा है कि वह हर हाल में अपने देश लौटेंगी। उन्होंने साफ कहा कि जेल जाना पड़े या जान का खतरा हो, फिर भी वह बांग्लादेश वापस जाएंगी क्योंकि देश के लोगों को सुरक्षा, विकास और लोकतंत्र की जरूरत है।
उन्होंने इस वर्ष दिसंबर, जिसे बांग्लादेश का ‘विजय का महीना’ माना जाता है, स्वदेश लौटने की इच्छा जताई है। हालांकि उन्होंने वापसी की कोई निश्चित तारीख नहीं बताई।

इधर हसीना सामने आईं, उधर शाकिब के घर पर हमला
करीब दो साल बाद शेख हसीना पहली बार वर्चुअल माध्यम से सार्वजनिक रूप से सामने आईं। इसी कार्यक्रम में बांग्लादेश के पूर्व कप्तान शाकिब अल हसन भी ऑनलाइन जुड़े थे। इसके बाद गुस्साई भीड़ ने उनके घर पर कथित तौर पर पेट्रोल बम से हमला कर आग लगा दी। इस घटना ने बांग्लादेश की राजनीति और क्रिकेट जगत में नई बहस छेड़ दी।
क्या है शेख हसीना और शाकिब अल हसन का कनेक्शन
शुरुआत में दोनों का रिश्ता प्रधानमंत्री और देश के सबसे बड़े क्रिकेट स्टार का था। 2019 में आईसीसी प्रतिबंध के दौरान भी शेख हसीना ने सार्वजनिक रूप से शाकिब का समर्थन किया था। बाद में 2023 में शाकिब ने अवामी लीग की सदस्यता ली और 2024 के चुनाव में सांसद बने। इसके बाद उनकी पहचान सिर्फ क्रिकेटर नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ दल के प्रमुख चेहरों में भी होने लगी।
सरकार बदली, हालात भी बदल गए
अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन और हिंसा के बाद शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा। सत्ता परिवर्तन के बाद अवामी लीग से जुड़े नेताओं और समर्थकों पर कार्रवाई शुरू हुई। शाकिब भी विरोधियों के निशाने पर आ गए और उन पर कई मामलों में जांच शुरू हुई। हालांकि उनके समर्थकों का कहना है कि ये कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है।
क्रिकेट के महान ऑलराउंडर, लेकिन राजनीति बनी मुश्किल
करीब दो दशक के अंतरराष्ट्रीय करियर में शाकिब अल हसन ने 447 मैचों में 14,730 रन बनाए और 712 विकेट लेकर खुद को बांग्लादेश के सबसे महान ऑलराउंडरों में स्थापित किया। लेकिन राजनीति में सक्रिय होने के बाद उनकी छवि और करियर दोनों पर असर पड़ा।
अब सबकी नजर दिसंबर पर
एक तरफ शेख हसीना ने हर हाल में बांग्लादेश लौटने का ऐलान किया है, तो दूसरी ओर शाकिब अल हसन अब भी विदेश में हैं और अपने देश लौटकर सम्मानजनक विदाई मैच खेलने की इच्छा जता चुके हैं। ऐसे में दिसंबर का महीना बांग्लादेश की राजनीति और क्रिकेट—दोनों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।


