रायपुर, 20 सितंबर। Vasundhara Project : छत्तीसगढ़ में राजस्व सेवाओं को अधिक सरल, तेज और पारदर्शी बनाने की दिशा में ‘वसुंधरा’ परियोजना के तहत बड़े स्तर पर डिजिटल बदलाव की तैयारी है। परियोजना के अंतर्गत जिला और तहसील स्तर के राजस्व रिकॉर्ड रूम का आधुनिकीकरण करने के साथ पुराने और वर्तमान राजस्व अभिलेखों को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित किया जाएगा। सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, इसके जरिए नागरिकों को प्रमाणित राजस्व दस्तावेज ऑनलाइन उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।
दंतेवाड़ा मॉडल से पूरे छत्तीसगढ़ तक पहुंचेगी डिजिटल व्यवस्था
वसुंधरा परियोजना के लिए दंतेवाड़ा में लागू किए गए मॉडल को आधार बनाया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दंतेवाड़ा में कियोस्क सेवाओं के जरिए बड़ी संख्या में नागरिकों ने राजस्व संबंधी सुविधाओं का लाभ लिया और जाति प्रमाण-पत्रों के वितरण समेत रिकॉर्ड संबंधी मामलों के निराकरण में तेजी लाई गई। इसी अनुभव के आधार पर अब प्रदेशभर में राजस्व अभिलेखों के डिजिटलीकरण की योजना तैयार की गई है।
12 करोड़ 89 लाख पेज होंगे डिजिटल, करोड़ों का बनेगा डिजिटल रिकॉर्ड बैंक
परियोजना के तहत लगभग 12 करोड़ 89 लाख पृष्ठों के राजस्व अभिलेखों को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित करने का खाका तैयार किया गया है। इसमें खसरा पांचसाला, B-1 रिकॉर्ड, नामांतरण एवं संशोधन पंजी, मिसल पंजी और अधिकार अभिलेख जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल हैं। इसके अलावा निस्तार पत्रक, वाजिब-उल-अर्ज, रीनंबरिंग सूची, साधारण खसरा, नजूल शीट और व्यवर्तन पंजी को भी डिजिटल किया जाएगा।
AI और ब्लॉकचेन से रिकॉर्ड की सुरक्षा, खोज होगी आसान
वसुंधरा परियोजना में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल का भी प्रावधान है। AI आधारित OCR और डॉक्यूमेंट क्लासिफिकेशन के जरिए पुराने दस्तावेजों को डिजिटल डेटा में बदला जाएगा, जबकि स्मार्ट सर्च की मदद से रिकॉर्ड को तेजी से खोजने की सुविधा विकसित की जाएगी। दस्तावेजों की सुरक्षा के लिए डिजिटल हस्ताक्षर, QR और बारकोड जैसी व्यवस्थाओं के साथ ब्लॉकचेन आधारित सुरक्षा प्रणाली प्रस्तावित है।
3-7 दिन की नकल अब मिनटों में मिलने का लक्ष्य
परियोजना पूरी तरह लागू होने के बाद वर्तमान में राजस्व अभिलेखों की नकल प्राप्त करने में लगने वाले समय को काफी कम करने का लक्ष्य रखा गया है। नागरिक वेब पोर्टल, मोबाइल ऐप, लोक सेवा केंद्र और कियोस्क के माध्यम से प्रमाणित अभिलेख प्राप्त कर सकेंगे। योजना के वित्तीय ढांचे में 65.41 करोड़ रुपए की एकमुश्त पूंजीगत लागत और 50 लाख रुपए वार्षिक परिचालन व्यय का प्रावधान बताया गया है।

