जयपुर, 31 अक्टूबर। Villa Cottage Controversy: राजस्थान में 40 विला और कॉटेज की खरीद को लेकर उठा विवाद अब बड़ा प्रशासनिक मामला बन गया है। इस मामले में पहले वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल को APO किया गया था। अब उनकी पत्नी और 1995 बैच की वरिष्ठ IPS अधिकारी डॉ. प्रशाखा माथुर पर भी सरकार ने कार्रवाई करते हुए उन्हें APO कर दिया है। वे पुलिस मुख्यालय में ADG पुलिस कल्याण के पद पर पदस्थ थीं। कार्मिक विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी किया है।

IAS पति के बाद IPS पत्नी पर भी गिरी गाज
40 विला-कॉटेज खरीद विवाद में राजस्थान सरकार ने एक और बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। IPS अधिकारी डॉ. प्रशाखा माथुर को APO कर दिया गया है। इससे पहले 28 अक्टूबर को उनके पति और वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल को भी APO किया जा चुका है। वहीं, शिखर अग्रवाल के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने प्रारंभिक जांच दर्ज की है। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-A के तहत प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
क्या है 40 विला-कॉटेज खरीद का पूरा विवाद?
मामला राजस्थान के अलवर जिले के अजबगढ़ और उदयपुर के बुझड़ा में 40 विला-कॉटेज की खरीद से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, IAS शिखर अग्रवाल और उनकी IPS पत्नी प्रशाखा माथुर ने गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड से करीब 6 करोड़ 16.5 लाख रुपये में ये संपत्तियां खरीदी थीं। बताया जा रहा है कि 20 कॉटेज की रजिस्ट्री 29 सितंबर 2023 को और 20 विला की रजिस्ट्री 27 मार्च 2026 को कराई गई। आरोप है कि खरीद के बाद इन संपत्तियों को उसी कंपनी को लीज पर दे दिया गया, जिससे इन्हें खरीदा गया था। मामले में कुछ संपत्तियों की जानकारी विभाग को नहीं दिए जाने को लेकर भी सवाल उठे हैं। इन्हीं तथ्यों और सामने आए आरोपों के बाद मामला चर्चा में आ गया है। हालांकि, संपत्ति खरीद से जुड़े आरोपों की जांच पूरी होने और किसी तरह की अनियमितता साबित होने की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
6.16 करोड़ की संपत्ति खरीद विवाद
शिखर अग्रवाल, उनकी पत्नी, जो कि एक IPS अधिकारी हैं, जिनका नाम प्रशाखा माथुर है और परिवार के अन्य सदस्यों ने लगभग ढाई साल के दौरान उदयपुर और अलवर स्थित ‘अनंता रिसॉर्ट्स’ में कुल 40 विला और कॉटेज खरीदे। ये संपत्तियां ‘गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की एक कंपनी से खरीदी गई थीं। इन संपत्तियों की कुल कीमत 6 करोड़ 16 लाख 50 हजार रुपये बताई गई है। पहली खरीदारी उदयपुर के बुझदा स्थित ‘अनंता रिसॉर्ट’ में हुई, जहां 29 सितंबर 2023 को 20 कॉटेज की सेल डीड (बिक्री विलेख) रजिस्टर कराई गईं।
इसके बाद, दूसरी खरीदारी अलवर के अजबगढ़ स्थित ‘अनंता रिसॉर्ट’ में हुई, जहां 27 मार्च 2026 को 20 विला की सेल डीड रजिस्टर कराई गईं। इस तरह, सितंबर 2023 से मार्च 2026 के बीच, परिवार ने इन दो जगहों पर कुल 40 संपत्तियां खरीदीं। इन खरीदारियों से जुड़े लीज़ एग्रीमेंट (पट्टा समझौतों) पर भी ध्यान गया है। संपत्तियां खरीदने के बाद, परिवार ने उसी कंपनी, ‘गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड’ को ये संपत्तियां वापस लीज़ पर देने के लिए दस्तावेज़ रजिस्टर कराए, जिससे इन्हें खरीदा गया था। पता चला है कि दोनों जगहों की संपत्तियों के लिए अलग-अलग वार्षिक लीज़ राशि तय की गई थी।
उदयपुर के बुझदा में स्थित 20 कॉटेज के लिए, हर यूनिट पर 4 लाख रुपये की वार्षिक लीज़ राशि तय की गई, जो कुल मिलाकर प्रति वर्ष 80 लाख रुपये होती है। वहीं, अलवर के अजबगढ़ में स्थित 20 विला के लिए, हर यूनिट पर 5 लाख रुपये की वार्षिक लीज़ राशि तय की गई, जो कुल मिलाकर प्रति वर्ष 1 करोड़ रुपये होती है। इन दोनों को मिलाकर, कुल वार्षिक लीज़ आय 1 करोड़ 80 लाख रुपये बनती है। रिपोर्ट में दिए गए दस्तावेजों के अनुसार, लगभग ₹6.16 करोड़ में संपत्तियां खरीदने के बाद, एक समझौता किया गया जिसके तहत इन संपत्तियों को उसी कंपनी को वापस लीज (पट्टे) पर दे दिया गया, जिससे इन्हें खरीदा गया था। इस पूरे लेन-देन, जिसमें संपत्तियों की खरीद और उसके बाद उन्हें लीज पर देना शामिल है, ने इन अधिकारियों की संपत्ति को लेकर चर्चाओं को जन्म दिया है।
पत्नी IPS अधिकारी, परिवार के सदस्यों के नाम पर भी संपत्तियां
शिखर अग्रवाल की पत्नी, प्रशाखा माथुर, भी एक वरिष्ठ अधिकारी हैं। वह भारतीय पुलिस सेवा (IPS) की अधिकारी हैं और राजस्थान पुलिस में अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) के पद पर काम कर चुकी हैं। ये 40 विला-कॉटेज शिखर अग्रवाल, प्रशाखा माथुर, उनके दो बेटों और प्रशाखा के माता-पिता के नाम पर रजिस्टर थे। बताया गया है कि कुल 28 विला-कॉटेज शिखर अग्रवाल और प्रशाखा माथुर के नाम पर हैं।
इन अधिकारियों द्वारा दाखिल की गई ‘अचल संपत्ति रिटर्न’ (IPR) जो कि उनकी संपत्तियों का वार्षिक विवरण होता है, को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। 7 जनवरी 2026 को दाखिल अपने IPR में, शिखर अग्रवाल ने 14 संपत्तियों का जिक्र किया था। इसके विपरीत, 8 जनवरी 2026 को प्रशाखा माथुर द्वारा दाखिल IPR में बताया गया कि उनके पास कोई संपत्ति नहीं है। परिणामस्वरूप, इन संपत्तियों के आधिकारिक पंजीकरण और अधिकारियों द्वारा घोषित जानकारी के बीच के अंतर को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
‘APO’ का अर्थ है ‘पोस्टिंग आदेशों की प्रतीक्षा’
यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें अधिकारी किसी नई तैनाती (assignment) का इंतजार कर रहा होता है। राजस्थान सरकार ने शिखर अग्रवाल को APO स्थिति में रखा है, और इस फैसले के पीछे ‘प्रशासनिक कारणों’ का हवाला दिया है। फिलहाल, शिखर अग्रवाल APO स्थिति में ही हैं, जबकि 40 विला-कॉटेज की खरीद से जुड़ा यह मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।
कौन हैं IPS डॉ. प्रशाखा माथुर?
डॉ. प्रशाखा माथुर राजस्थान कैडर की 1995 बैच की IPS अधिकारी हैं। उनका जन्म 27 नवंबर 1969 को हुआ और वे मूल रूप से अजमेर की रहने वाली हैं। उन्होंने MBBS और MPM की पढ़ाई की है। अपने सेवाकाल में उन्होंने अलवर सिटी, जयपुर महिला थाना उत्तर, सिरोही, जोधपुर, अजमेर GRP, जोधपुर ग्रामीण, बांसवाड़ा और पाली सहित कई महत्वपूर्ण स्थानों पर जिम्मेदारी संभाली है।
कौन हैं IAS शिखर अग्रवाल?
शिखर अग्रवाल राजस्थान कैडर के 1993 बैच के वरिष्ठ IAS अधिकारी हैं। उन्होंने IIT कानपुर से सिविल इंजीनियरिंग में B.Tech किया है। राजस्थान में वे उद्योग, निवेश, जल संसाधन, वन एवं पर्यावरण, जनजातीय क्षेत्र विकास और अन्य महत्वपूर्ण विभागों में जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वे जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) के आयुक्त भी रह चुके हैं। फरवरी 2024 में उन्हें मुख्यमंत्री का अतिरिक्त मुख्य सचिव बनाया गया था। 28 अक्टूबर 2026 को उन्हें APO कर दिया गया।


