Durg 4 Crore Cash Seizure: दुर्ग में सीक्रेट चेंबर से मिले थे 4 करोड़! कारोबारी ने मांगी रकम, कोर्ट ने खारिज की याचिका; आयकर विभाग कर रहा जांच

Durg 4 Crore Cash Seizure: दुर्ग में सीक्रेट चेंबर से मिले थे 4 करोड़! कारोबारी ने मांगी रकम, कोर्ट ने खारिज की याचिका; आयकर विभाग कर रहा जांच

दुर्ग-भिलाई, 31 अक्टूबर। Durg 4 Crore Cash Seizure: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में जब्त 4 करोड़ रुपये नकद के मामले में कारोबारी कमलेश आर. शाह को कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। जब्त रकम पर अपना दावा करते हुए कारोबारी ने अदालत में याचिका लगाई थी, लेकिन न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अंजली सिंह की अदालत ने उनके दोनों आवेदन खारिज कर दिए हैं। फिलहाल 4 करोड़ रुपये पुलिस की जब्ती में रहेंगे। मामले की जांच आयकर विभाग कर रहा है।

सीक्रेट चेंबर में मिले थे 4 करोड़ रुपये

दरअसल, 25 अक्टूबर की रात दुर्ग पुलिस ने रायपुर-दुर्ग मुख्य मार्ग पर वाहन चेकिंग के दौरान रायपुर से नागपुर जा रही सफेद बोलेरो मैक्स पिकअप को रोका था। तलाशी के दौरान गाड़ी के पिछले हिस्से में बने सीक्रेट चेंबर से 500, 200 और 100 रुपये के नोटों में कुल 4 करोड़ रुपये बरामद हुए थे। संतोषजनक दस्तावेज नहीं मिलने पर पुलिस ने BNSS की धारा 106 के तहत नकदी और वाहन जब्त कर लिया था।

कारोबारी का दावा- खाते में 53 करोड़ रुपये

कारोबारी कमलेश आर. शाह ने अदालत में आवेदन देकर जब्त रकम वापस करने की मांग की थी। उनका दावा था कि यह पैसा उनके पारिवारिक कारोबार का है। उन्होंने बताया कि उनकी दिवंगत पत्नी नीना शाह ‘मेसर्स मेक टेक’ (M/S MECTEC) के नाम से कृषि संबंधी कारोबार करती थीं। पत्नी के निधन के बाद अकोला कोर्ट ने उन्हें और उनकी बेटियों को कानूनी वारिस घोषित किया है। कारोबारी ने अदालत में यह भी दलील दी कि उनकी फर्म का वित्तीय कारोबार करोड़ों रुपये का है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में एक करोड़ रुपये से अधिक टैक्स जमा किया गया है। ऑडिट रिपोर्ट में 53 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि का उल्लेख होने का दावा भी किया गया। उनके मुताबिक, व्यापारिक काम के लिए यह रकम रायपुर से नागपुर ले जाई जा रही थी।

पुलिस और आयकर विभाग ने किया विरोध

सुनवाई के दौरान पुलिस और आयकर विभाग ने कारोबारी के दावों पर आपत्ति जताई। जांच एजेंसियों के अनुसार, वाहन में मौजूद लोगों के बयानों और कारोबारी की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण में अंतर पाया गया है। शुरुआती पूछताछ में रकम को ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़ा बताया गया था, जबकि बाद में इसे दूसरी फर्म का पैसा बताया गया। वाहन में मौजूद लोग कारोबारी के कर्मचारी हैं या नहीं, इस संबंध में भी पर्याप्त दस्तावेज नहीं मिलने की बात सामने आई। आयकर विभाग ने अदालत को बताया कि मामले में जांच शुरू कर दी गई है और इस संबंध में 9 पन्नों की रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई है।

कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?

न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अंजली सिंह की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कारोबारी के दोनों आवेदन खारिज कर दिए। अदालत ने माना कि मामले की जांच आयकर विभाग द्वारा की जा रही है। ऐसे में जांच पूरी होने तक जब्त 4 करोड़ रुपये कारोबारी को वापस नहीं सौंपे जा सकते। फिलहाल 4 करोड़ रुपये की नकदी जब्ती का मामला जांच के दायरे में है। अब सबकी नजर आयकर विभाग की जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी है।

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