रायपुर, 02 नवंबर 2026। Women Empowerment : छत्तीसगढ़ में महिला स्व-सहायता समूहों के जरिए ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। रायगढ़ जिले के डूमरमुड़ा गांव का सरस्वती महिला स्व-सहायता समूह इसका उदाहरण बनकर उभरा है। समूह की 10 महिलाएं रेडी-टू-ईट पोषण आहार का निर्माण कर हर महीने लगभग 50 हजार रुपये का मुनाफा कमा रही हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में जिले में महिलाओं की आजीविका और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जा रहा है।
बिहान योजना से बदली महिलाओं की आर्थिक स्थिति
डूमरमुड़ा की सरस्वती महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य चम्पा चौहान के मुताबिक, बिहान योजना से जुड़ने के बाद महिलाओं को आजीविका के नए अवसर मिले। अप्रैल 2026 से समूह को रेडी-टू-ईट पोषण आहार निर्माण का काम मिला। इसके बाद समूह की सभी 10 महिलाएं नियमित रूप से इस काम में जुट गईं।
पहले महिलाओं के पास आय अर्जित करने के सीमित साधन थे, लेकिन अब वे सामूहिक रूप से काम कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं। चम्पा चौहान बताती हैं कि इस काम से महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है। अब वे अपनी जरूरतों के लिए खुद आय अर्जित कर रही हैं और परिवार के खर्चों में योगदान दे रही हैं।
आधुनिक मशीनों से तैयार हो रहा पोषण आहार
सरस्वती समूह की महिलाएं निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार रेडी-टू-ईट पोषण आहार तैयार करती हैं। सबसे पहले गेहूं, चना, सोयाबीन और अन्य आवश्यक सामग्रियों की मशीनों से सफाई की जाती है। इसके बाद भुनाई, पिसाई और छनाई की प्रक्रिया पूरी होती है। तैयार सामग्री को निर्धारित अनुपात में मिक्सिंग मशीन से मिलाया जाता है। अंत में मिश्रण की पैकिंग की जाती है।
समूह की महिलाएं उत्पादन से लेकर पैकिंग और वितरण तक की जिम्मेदारी संभालती हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों से प्राप्त मांगपत्र के अनुसार तैयार पोषण आहार की आपूर्ति की जाती है। इससे महिलाओं को खाद्य प्रसंस्करण और उत्पादन प्रबंधन का व्यावहारिक अनुभव भी मिल रहा है।
हर महीने करीब 50 हजार रुपये का मुनाफा
समूह की सदस्य चम्पा चौहान के अनुसार, रेडी-टू-ईट पोषण आहार के निर्माण और वितरण से सरस्वती समूह को प्रतिमाह लगभग 50 हजार रुपये तक का मुनाफा मिल रहा है। इस आय से समूह की महिलाओं और उनके परिवारों को आर्थिक संबल मिल रहा है।
नियमित काम मिलने से महिलाओं में आर्थिक सुरक्षा की भावना बढ़ी है। वे सामूहिक निर्णय लेने, उत्पादन का प्रबंधन करने और आर्थिक गतिविधियों को संचालित करने में भी दक्ष हो रही हैं।
2,709 आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए 10 समूहों का चयन
रायगढ़ जिले में कुल 2,709 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनके लिए पूरक पोषण आहार रेडी-टू-ईट निर्माण के उद्देश्य से 10 महिला स्व-सहायता समूहों का चयन किया गया है। इन समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार देने के साथ आंगनबाड़ी केंद्रों तक पोषण आहार की आपूर्ति सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।
चयनित समूहों को प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) के तहत पूंजीगत सब्सिडी भी दी जा रही है। इससे खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी गतिविधियों के संचालन और जरूरी संसाधन विकसित करने में मदद मिल रही है।
महिला सशक्तिकरण और पोषण सुरक्षा को मिल रहा बढ़ावा
रेडी-टू-ईट निर्माण की यह पहल महिलाओं की आय बढ़ाने के साथ बच्चों और महिलाओं तक पूरक पोषण आहार पहुंचाने में भी योगदान दे रही है। बिहान योजना के जरिए स्व-सहायता समूहों को उत्पादन आधारित गतिविधियों से जोड़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार की संभावनाएं बढ़ रही हैं।
डूमरमुड़ा का सरस्वती समूह दिखाता है कि उचित अवसर, प्रशिक्षण और संस्थागत सहयोग मिलने पर ग्रामीण महिलाएं सामूहिक उद्यम के माध्यम से आत्मनिर्भर बन सकती हैं।





